"एक 'बागी' चेतना का अवसान:
बागी कुमार वर्मा और उनका विरासत भरा सफर"
विजय कुमार वरिष्ठ पत्रकार
गया: इटवा-बांके बाजार स्थित उपेंद्र नाथ वर्मा इंटर कॉलेज का सभा कक्ष आज सिर्फ एक कमरा नहीं, बल्कि आंसुओं, स्मृतियों और कृतज्ञता का समंदर बना हुआ था।
अवसर था— बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष बागी कुमार वर्मा जी की श्रद्धांजलि सभा का।
इस सभा में समाज के हर वर्ग, राजनीतिक दलों के नेताओं, शिक्षाविदों और स्थानीय गणमान्य लोगों की भारी उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि बागी जी का कद सिर्फ एक राजनेता का नहीं, बल्कि जन-जन के अभिभावक का था।
एक जननेता की पहचान:
सादगी और संघर्ष,
बागी कुमार वर्मा जी का पूरा जीवन जनसेवा और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के प्रति समर्पित रहा।
बिहार की राजनीति में उन्होंने एक ऐसा दौर देखा और जिया, जहां जमीन से जुड़कर ही नेता अपनी पहचान बनाते थे।
सच्चे समाजवादी:
पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत उपेंद्र नाथ वर्मा जी की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने हमेशा दबे-कुचले और वंचित समाज की आवाज को बुलंद किया।
विकास की सोच:
बिहार सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, सिंचाई और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए कई उल्लेखनीय कार्य किए।
शिक्षा के प्रति अनुराग
इटवा के उपेंद्र नाथ वर्मा इंटर कॉलेज से उनका जुड़ाव महज एक पद (अध्यक्ष) का नहीं था। वे मानते थे कि ग्रामीण परिवेश के युवाओं को जब तक उच्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक समाज का वास्तविक सशक्तिकरण असंभव है।
आज उनकी श्रद्धांजलि सभा का इसी कॉलेज परिसर में होना इस बात का प्रतीक है कि उनकी आत्मा आज भी शिक्षा के इस मंदिर और इसके छात्र-छात्राओं में बसती है।
श्रद्धांजलि सभा का संदेश,
इस कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोगों के वक्तव्यों से एक बात साफ झलकी— बागी जी पार्टी लाइन से ऊपर उठकर हर व्यक्ति के सुख-दुख में खड़े होने वाले नेता थे।
वक्ताओं ने उनके जीवन के अनछुए पहलुओं को याद किया और बताया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
सत्यता:
बागी कुमार वर्मा बिहार के एक बेहद प्रतिष्ठित और कद्दावर नेता रहे हैं।
वे गया जिले के इमामगंज ,अतरी और मखदुमपुर (जहानाबाद) जैसे क्षेत्रों से भी जुड़े रहे और बिहार सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
उनके पिता स्वर्गीय उपेंद्र नाथ वर्मा भारत सरकार के पूर्व ग्रामीण विकास राज्य मंत्री थे, जिनके नाम पर यह कॉलेज स्थापित है।,
महत्व:
बागी जी का जाना मगध क्षेत्र (गया, औरंगाबाद, जहानाबाद) के लिए एक युग का अंत है। वे उस पुरानी पीढ़ी के समाजवादी नेता थे जो कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद रखते थे।
प्रासंगिकता:
इस प्रकार की श्रद्धांजलि सभाएं यह दर्शाती हैं कि आज के दौर में भी वैचारिक राजनीति और शिक्षा के प्रति समर्पित नेताओं का समाज में कितना ऊंचा स्थान है।
"शारीरिक रूप से बागी कुमार वर्मा जी भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन बांकेबाजार की मिट्टी, वहां के कॉलेज की दीवारें और क्षेत्र के विकास में उनका योगदान हमेशा उनकी मौजूदगी का अहसास कराता रहेगा।"
सादर श्रद्धांजलि! ओम शांति!