logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

तापमान ने बढ़ाई किसानों की चिंता; फूल झड़ने और फल छोटे रहने से उत्पादन घटा* *हीट वेव से जायद फसलें झुलसीं: टमाटर, तोरी की बढ़वार रुकी*

*तापमान ने बढ़ाई किसानों की चिंता; फूल झड़ने और फल छोटे रहने से उत्पादन घटा*
*हीट वेव से जायद फसलें झुलसीं: टमाटर, तोरी की बढ़वार रुकी, तरबूज में नुकसान*

खैरथल हीरालाल भूरानी
जिले में पड़ रही भीषण गर्मी और हीट वेव अब जायद फसलों पर भारी पड़ने लगी है। सब्जियों की फसलें मुरझाने लगी हैं। पौधों की बढ़वार रुक गई है, कई जगह फल छोटे आकार में ही पककर सूख रहे हैं।
गुरगचका गांव के किसान गणपत यादव ने बताया कि भीषण गर्मी में टमाटर और लौकी के पौधों की बढ़वार रुक गई है। तेज लू के कारण पौधे दोपहर में मुरझा जाते हैं और कई फल छोटे आकार में ही सूख रहे हैं। बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे लागत भी बढ़ गई है। हांसपुर गांव के किसान हुकम सिंह ने कहा कि तापमान बढ़ने में पौधे झुलसने लगे हैं। फूल झड़ रहे हैं और फल नहीं बन पा रहे हैं। पतलिया गांव के किसान भीमसिंह ने बताया कि गर्म हवा से खेत की नमी तेजी से खत्म हो रही है। एक-दो दिन पानी देर से देने पर ही मिर्च और टमाटर की फसल प्रभावित हो रही है। फलों का आकार छोटा रह गया है, अच्छे दाम मिलने की उम्मीद भी कम हो गई है। किसान प्रदीप चौधरी ने बताया कि तेज धूप और ग्राम हवा के कारण तरबूज और खरबूज की बेल सूखने लगी है। किसान सूबेसिंह ने बताया कि टमाटर और देसी टिंडे के पौधों पर लगने वाले फल पूरी तरह विकसित नहीं हो पा रहे हैं। कई जगह पौधों की पत्तियां पीली पड़ गई हैं और उत्पादन आधे से भी कम होने की आशंका है।
कृषि विभाग के अनुसार इस बार खैरथल तिजारा जिले में करीब 472 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों की खेती की गई है, जबकि 1002 हेक्टेयर में हरे चारे की बुवाई हुई है। सब्जियों की फसल के लिए 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तक तापमान अनुकूल माना जाता है, लेकिन तापमान 40 डिग्री पार करते ही पौधों की बढ़वार रुक जाती है। फूलों के परागकण सूखने लगते हैं और फूल झड़ जाते हैं। लू के असर से पौधे मुरझाकर पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं।
*इनका कहना है --*
इस संबंध में उद्यान विभाग खैरथल के उप निदेशक गोपाल लाल मीणा ने बताया कि गर्मी के मौसम में फसलों में नमी बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए ड्रिप इरिगेशन या बूंद बूंद सिंचाई पद्धति अपनानी चाहिए ताकि पौधों को समय-समय पर पर्याप्त पानी मिलता रहे।
*फोटो कैप्शन -खैरथल के पास एक खेत में भीषण गर्मी के कारण सूख रही तरबूज की बेल।*

0
0 views

Comment