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संत सुरक्षा को लेकर जैन समाज का मौन जुलूस, ज्ञापन सौंपा*

संत सुरक्षा को लेकर जैन समाज का मौन जुलूस, ज्ञापन सौंपा*

रीवा में विहाररत जैन आर्यिका साध्वी संघ के साथ हुई हृदयविदारक दुर्घटना के विरोध में सकल जैन श्री संघ वर्धमानपुर, बदनावर द्वारा सोमवार को नगर में विशाल मौन जुलूस निकाला गया। जुलूस के माध्यम से समाजजनों ने संत सुरक्षा की मांग उठाते हुए मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, जिलाधीश एवं पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपा।

जानकारी के अनुसार 20 मई 2026 को रीवा में प्रातःकाल एक ऑल्टो कार ने विहाररत जैन साध्वी संघ को टक्कर मार दी थी। हादसे में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित पूज्य आर्यिका श्री उपशम मति माताजी एवं पूज्य आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, जिनकी बाद में असामयिक समाधि हो गई। घटना से जैन समाज में गहरा दुख एवं आक्रोश व्याप्त है।

इसी के विरोध में आयोजित मौन जुलूस में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं एवं बच्चों ने शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से भाग लिया। समाजजन हाथों में संत सुरक्षा, अहिंसा एवं न्याय से जुड़े संदेशों की तख्तियां लेकर नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरे। तख्तियों पर “संत सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय नीति लागू करो”, “विहाररत संतों को सुरक्षा दो”, “संत सुरक्षा राष्ट्र की नैतिक जिम्मेदारी” तथा “पूज्य आर्यिका माताजी को भावपूर्ण विनयांजलि” जैसे संदेश लिखे हुए थे।

मौन जुलूस नगर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ बस स्टैंड पहुंचा, जहां समाज प्रमुखों ने उपस्थितजनों को संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि जैन साधु-संत अहिंसा, संयम एवं शांति का संदेश देने वाले तपस्वी होते हैं। ऐसे संतों के साथ इस प्रकार की घटनाएं अत्यंत पीड़ादायक एवं चिंताजनक हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, जिलाधीश धार एवं पुलिस अधीक्षक धार के नाम ज्ञापन SDM एवं SDOP बदनावर के माध्यम से सौंपा गया। ज्ञापन में रीवा दुर्घटना की निष्पक्ष SIT अथवा न्यायिक जांच कराने, CCTV फुटेज एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने तथा विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा हेतु “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग की गई। साथ ही “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाए जाने एवं स्थानीय प्रशासन व समाज के मध्य “संत सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन सेल” गठित करने की मांग भी रखी गई।

कार्यक्रम का समापन पूज्य आर्यिका माताजी को विनयांजलि अर्पित करने एवं संत सुरक्षा का संकल्प लेने के साथ शांतिपूर्वक हुआ।

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