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पूरनपुर में बिजली संकट पर भड़का किसानों का गुस्सा, अधिशासी अभियंता कार्यालय पर 5 घंटे दिया धरना

पूरनपुर (पीलीभीत)। भीषण गर्मी के बीच अघोषित बिजली कटौती और विद्युत विभाग की कथित लापरवाही को लेकर सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (भानू गुट) का गुस्सा फूट पड़ा। कार्यकर्ताओं ने पूरनपुर स्थित अधिशासी अभियंता कार्यालय पर दोपहर 3 बजे से लगातार पांच घंटे तक जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद किसानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और एसडीओ (विद्युत) पूरनपुर को सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की।
​सरकार के दावों की खुली पोल: किसान नेता
​धरने को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 21 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
​भारी किल्लत: अघोषित कटौती और बार-बार होने वाली ट्रिपिंग से आम जनता और व्यापारी त्रस्त हैं।
​फसलें प्रभावित: सबसे बुरा असर किसानों पर पड़ रहा है। बिजली न मिलने से फसलों की सिंचाई ठप हो गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
​भाकियू (भानू) की प्रमुख मांगें:
​यूनियन ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखते हुए एक मांग पत्र सौंपा, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
​रोस्टर के अनुसार आपूर्ति: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिना ट्रिपिंग के रोस्टर के मुताबिक पूरी बिजली दी जाए।
​जल्द बदले जाएं ट्रांसफार्मर: ग्रामीण इलाकों में फुके और खराब पड़े ट्रांसफार्मर को बिना देरी के बदला जाए।
​समाधान कैंप का आयोजन: बिजली बिलों की गड़बड़ी और अन्य उपभोक्ताओं की शिकायतों के निपटारे के लिए सप्ताह में एक दिन विशेष समाधान कैंप लगाया जाए।
​पारदर्शी नए कनेक्शन: नए बिजली कनेक्शन देने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और इसके लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए।
​प्रशासन को चेतावनी: 'नहीं सुधरे हालात तो करेंगे चक्का जाम'
​भाकियू पदाधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि इन समस्याओं को लेकर पूर्व में भी ज्ञापन देकर प्रशासन को 20 दिन का समय दिया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
​"अगर इस बार भी हमारी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो भारतीय किसान यूनियन (भानू) उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने को मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला व पुलिस प्रशासन की होगी।"
— यूनियन पदाधिकारी
​इस प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में स्थानीय किसान और संगठन के प्रमुख पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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