कहानी बहुत पहले लिखी जा चुकी है
मनुष्य जब इस संसार में जन्म लेता है, तब वह अपने साथ अनगिनत सपने, इच्छाएँ, रिश्ते और उम्मीदें लेकर आता है। Dr Md Firoz
कहानी बहुत पहले लिखी जा चुकी है
मनुष्य जब इस संसार में जन्म लेता है, तब वह अपने साथ अनगिनत सपने, इच्छाएँ, रिश्ते और उम्मीदें लेकर आता है। वह धीरे-धीरे इस दुनिया को समझना शुरू करता है। बचपन में उसे लगता है कि जो लोग उसके आसपास हैं, वे हमेशा उसके साथ रहेंगे। उसे लगता है कि उसके माता-पिता, दोस्त, रिश्तेदार, उसकी खुशियाँ, उसका घर, उसकी दुनिया कभी नहीं बदलेगी। लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता है, जीवन उसे धीरे-धीरे एक ऐसा सत्य सिखाता है जिसे समझने में कई लोग पूरी उम्र लगा देते हैं — इस संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है।
जो आया है, वह जाएगा।
जो मिला है, वह छूटेगा।
जो बना है, वह टूटेगा।
और जो शुरू हुआ है, उसका अंत भी निश्चित है।
यही जीवन का सबसे बड़ा और सबसे कठोर सत्य है।
मनुष्य अक्सर अपने रिश्तों, अपने धन, अपनी सफलताओं और अपने प्रिय लोगों को स्थायी मान बैठता है। वह भूल जाता है कि यह संसार परिवर्तन का संसार है। यहाँ हर चीज़ समय के अधीन है। समय से बड़ा न कोई राजा हुआ है, न कोई योद्धा, न कोई प्रेमी और न कोई संत। समय सबको बदल देता है। कभी जो लोग एक-दूसरे के बिना एक पल नहीं रह सकते थे, वही समय आने पर एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं। कभी जो दोस्ती जीवन भर साथ निभाने की कसमें खाती थी, वही परिस्थितियों के बदलते ही अजनबी बन जाती है। कभी जो व्यक्ति हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा लगता था, वही एक दिन हमारी कहानी से बाहर चला जाता है।
तब मनुष्य दुखी होता है। वह टूट जाता है। उसे लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है। वह सोचता है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? क्यों कोई अपना बदल गया? क्यों कोई रिश्ता टूट गया? क्यों कोई व्यक्ति छोड़कर चला गया? लेकिन शायद हम यह समझ नहीं पाते कि हर घटना के पीछे केवल व्यक्ति नहीं होता, समय भी होता है। कई बार लोग केवल माध्यम बनते हैं। परिस्थितियाँ केवल मोहरे होती हैं। जो होना तय है, वह किसी न किसी रास्ते से होकर घटित हो ही जाता है।
प्रकृति का यही नियम है।
पेड़ से पत्ते जब गिरते हैं, तो पेड़ उनसे नाराज़ नहीं होता। वह यह नहीं सोचता कि पत्तों ने उसका साथ छोड़ दिया। वह जानता है कि यह मौसम का नियम है। पतझड़ आएगा तो पत्ते गिरेंगे, फिर बसंत आएगा तो नए पत्ते भी उगेंगे। लेकिन मनुष्य हर बिछड़ने को स्थायी दुख बना लेता है। वह यह भूल जाता है कि जीवन में खाली हुई जगहें कभी हमेशा खाली नहीं रहतीं। वहाँ समय नए लोग, नए अवसर और नई कहानियाँ लेकर आता है।
हम सब इस विशाल संसार के केवल किरदार हैं। हमारी भूमिका सीमित है। हम अपने हिस्से के दृश्य निभाकर आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन मनुष्य की सबसे बड़ी भूल यह है कि वह स्वयं को पूरी कहानी का लेखक समझने लगता है। जबकि सच्चाई यह है कि हम केवल पात्र हैं। कहानी बहुत पहले लिखी जा चुकी है।
कभी-कभी हम किसी व्यक्ति को अपने जीवन से जाने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। हम अपने स्वाभिमान तक को छोड़ देते हैं। हम रोते हैं, मनाते हैं, समझाते हैं, इंतजार करते हैं। लेकिन जो व्यक्ति, जो रिश्ता या जो परिस्थिति हमारे जीवन से जाने के लिए बनी है, वह आखिरकार चली ही जाती है। क्योंकि कुछ चीजें हमारे चाहने या न चाहने से नहीं बदलतीं। संसार केवल हमारी इच्छाओं से नहीं चलता। यहाँ हर चीज़ का एक समय निश्चित है।
सूरज रोज उगता है और रोज डूबता है।
नदी बहती रहती है।
ऋतुएँ बदलती रहती हैं।
फूल खिलते हैं और मुरझा जाते हैं।
जीवन भी ठीक ऐसा ही है।
यदि हम ध्यान से देखें तो प्रकृति हर पल हमें विरक्ति का पाठ पढ़ाती है। लेकिन मनुष्य मोह में इतना बंध जाता है कि वह हर चीज़ को पकड़कर रखना चाहता है। वह चाहता है कि उसकी खुशियाँ कभी समाप्त न हों। उसके अपने लोग कभी दूर न जाएँ। उसकी जवानी कभी ढले नहीं। उसका सम्मान कभी कम न हो। लेकिन यह संसार पकड़कर रखने का नहीं, स्वीकार करने का संसार है।
जो जितना जल्दी इस सत्य को समझ लेता है, वह उतना ही शांत हो जाता है।
कई बार किसी के जाने के बाद हमें लगता है कि अब जीवन में कुछ नहीं बचा। जैसे सब खत्म हो गया हो। लेकिन समय धीरे-धीरे हमें यह एहसास दिलाता है कि जीवन किसी एक व्यक्ति, एक रिश्ते या एक घटना पर नहीं रुकता। जिस रास्ते पर हम रोते हुए खड़े रह जाते हैं, उसी रास्ते पर जीवन आगे बढ़ता रहता है। नए लोग आते हैं। नई जिम्मेदारियाँ आती हैं। नए अवसर सामने आते हैं। और एक दिन वही व्यक्ति जो कभी टूट चुका था, फिर मुस्कुराना सीख जाता है।
यही जीवन की सबसे बड़ी खूबसूरती है — यह कभी रुकता नहीं।
मनुष्य का दुख केवल खोने में नहीं होता, बल्कि उसके पीछे छिपे मोह में होता है। हम जिसे “मेरा” मान लेते हैं, उसके जाने पर सबसे अधिक दुख होता है। लेकिन सच्चाई यह है कि इस संसार में वास्तव में कुछ भी हमारा नहीं है। हम खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाएंगे। जो लोग आज हमारे साथ हैं, वे भी समय के यात्री हैं। हम भी किसी की कहानी में केवल एक किरदार हैं।
इसलिए जीवन में जब कोई व्यक्ति दूर हो जाए, कोई रिश्ता टूट जाए, कोई अवसर हाथ से निकल जाए, तो स्वयं को पूरी तरह समाप्त मत समझो। हर अंत अपने साथ एक नई शुरुआत लेकर आता है। जब एक दरवाजा बंद होता है, तभी दूसरा खुलता है। लेकिन दुख में डूबा मन अक्सर नए दरवाजों को देख नहीं पाता।
कई बार ईश्वर या प्रकृति हमें उन चीज़ों से दूर करती है, जिन्हें हम अपने लिए आवश्यक समझते हैं, क्योंकि शायद हमारे लिए कुछ और बेहतर तय होता है। उस समय हमें केवल दर्द दिखाई देता है, लेकिन समय के बाद वही घटनाएँ हमें समझ में आने लगती हैं। पीछे मुड़कर देखने पर पता चलता है कि जो खोया था, वह शायद हमारे लिए बना ही नहीं था।
मनुष्य को सबसे अधिक पीड़ा तब होती है जब उसका भरोसा टूटता है। जब कोई अपना बदल जाता है। जब प्रेम में दूरी आ जाती है। जब दोस्ती में स्वार्थ आ जाता है। लेकिन यह संसार ऐसा ही है। यहाँ लोग भी बदलते हैं, परिस्थितियाँ भी बदलती हैं और भावनाएँ भी बदलती हैं। केवल परिवर्तन ही स्थायी है।
इसलिए बुद्धिमानी इसी में है कि हम जीवन को पकड़कर नहीं, समझकर जिएँ।
जिस दिन मनुष्य यह स्वीकार कर लेता है कि हर रिश्ता, हर खुशी, हर दुख और हर परिस्थिति अस्थायी है, उसी दिन उसके भीतर एक अजीब-सी शांति जन्म लेने लगती है। फिर वह किसी के आने पर अहंकार नहीं करता और किसी के जाने पर पूरी तरह टूटता नहीं। वह समझ जाता है कि जीवन एक यात्रा है। यहाँ मिलना और बिछड़ना दोनों ही आवश्यक हैं।
जैसे रेल यात्रा में कुछ लोग कुछ समय के लिए साथ बैठते हैं, बातें करते हैं, हँसते हैं और फिर अपने स्टेशन पर उतर जाते हैं, वैसे ही जीवन में भी लोग आते हैं और चले जाते हैं। लेकिन हम भूल जाते हैं कि किसी का साथ हमेशा के लिए नहीं होता। हम हर रिश्ते को स्थायी मान लेते हैं, और जब वह बदलता है तो हम दुखी हो जाते हैं।
जीवन का अर्थ केवल पाना नहीं है, छोड़ना भी है।
यदि पेड़ पुराने पत्तों को छोड़ने से इनकार कर दे, तो नए पत्ते कभी नहीं उगेंगे। यदि रात समाप्त न हो, तो सुबह कभी नहीं आएगी। यदि बीता हुआ समय लौटकर आता रहे, तो नया समय जन्म ही नहीं ले पाएगा। इसलिए जो चला गया, उसे जाने देना भी जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसका अर्थ यह नहीं कि प्रेम मत करो या रिश्तों को महत्व मत दो। बल्कि इसका अर्थ यह है कि प्रेम करो, लेकिन मोह में मत डूबो। रिश्ते निभाओ, लेकिन स्वयं को उनमें खो मत दो। क्योंकि जब मनुष्य अपनी पूरी पहचान किसी एक व्यक्ति या रिश्ते से जोड़ देता है, तब उसके जाने पर वह स्वयं को खो देता है।
स्वयं को इतना मजबूत बनाना चाहिए कि जीवन में कोई आए तो खुशी हो, लेकिन कोई जाए तो जीवन रुक न जाए।
दुनिया में सबसे सुंदर लोग वे नहीं होते जिनके पास सब कुछ होता है, बल्कि वे होते हैं जिन्होंने बहुत कुछ खोने के बाद भी मुस्कुराना सीखा होता है। जिन्होंने दर्द को समझा होता है। जिन्होंने बिछड़ने को स्वीकार किया होता है। जिन्होंने समय की कठोरता को महसूस किया होता है। ऐसे लोग भीतर से बहुत गहरे और शांत हो जाते हैं।
जीवन का सबसे बड़ा ज्ञान शायद यही है कि जो आज है, वह कल नहीं रहेगा। इसलिए वर्तमान को प्रेम से जियो। अपने लोगों की कद्र करो। रिश्तों में सच्चाई रखो। किसी का दिल मत दुखाओ। लेकिन साथ ही यह भी याद रखो कि एक दिन सब बदल जाएगा। यही संसार का नियम है।
जब हम इस सत्य को स्वीकार कर लेते हैं, तब जीवन आसान नहीं होता, लेकिन मन शांत होने लगता है। तब हम शिकायत कम और समझ अधिक करने लगते हैं। तब हम हर बिछड़ने को अंत नहीं, परिवर्तन मानने लगते हैं।
और शायद यही परिपक्वता है।
जो चला गया, उसके लिए हमेशा रोते रहना जीवन नहीं है। जीवन है — यादों को सम्मान देना, अनुभवों से सीखना और आगे बढ़ना। क्योंकि समय कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता। वह लगातार आगे बढ़ता रहता है। और जीवन भी उसी के साथ चलता रहता है।
इसलिए यदि आज आपके जीवन से कुछ छूट गया है, कोई व्यक्ति दूर चला गया है, कोई सपना टूट गया है या कोई रिश्ता समाप्त हो गया है, तो स्वयं को समाप्त मत समझिए। शायद यह केवल कहानी का एक अध्याय समाप्त हुआ है। पूरी कहानी अभी बाकी है।
हो सकता है आने वाला समय आपके लिए ऐसी खुशियाँ लेकर आए जिनकी आपने कल्पना भी न की हो। हो सकता है जिन रास्तों को आप आज अंधेरा समझ रहे हैं, वही कल आपको नई मंज़िल तक ले जाएँ।
इस संसार में हर चीज़ बदलती है। दुख भी स्थायी नहीं होता। दर्द भी हमेशा नहीं रहता। रात चाहे कितनी भी लंबी हो, सुबह जरूर आती है।
इसलिए जीवन को स्वीकार करो।
जो चला गया, उसे सम्मानपूर्वक विदा दो।
जो है, उसकी कद्र करो।
और जो आने वाला है, उसका खुले दिल से स्वागत करो।
क्योंकि हम केवल किरदार हैं…
कहानी तो बहुत पहले लिखी जा चुकी है।
Dr Md Firoz Alam General Physician Director of Aleena health care Naraini with district presidents of AIMA MEDIA member of JUH Cybersecurity Volunteer Member of all india police friends organisation New Delhi
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