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स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर एवं पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जाए: पवैया

स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर एवं पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जाए: श्री पवैया

विकास कार्यों में गुणवत्ता, नवाचार एवं जनभागीदारी को प्राथमिकता देने की आवश्यकता

सोलर ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण एवं स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के दिए सुझाव

संभागीय समीक्षा बैठक संपन्न

राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि जब भी बजट तैयार किया जाए, वह यथार्थपरक एवं व्यवहारिक होना चाहिए। वित्तपोषण के तीन प्रमुख माध्यम होते हैं - एक केंद्र एवं दूसरा राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान तथा तीसरा स्वयं का राजस्व अर्जित करना। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्वशासी संस्थाओं, जैसे पंचायतों एवं नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनने के लिए स्वयं के राजस्व स्रोत विकसित करने के प्रयास करना चाहिए। वह कलेक्ट्रेट सभागार मुरैना में बैठक ले रहे थे।
उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं से यह अपेक्षा भी की जाती है कि वे जनहित में नवाचार एवं बेहतर कार्यों को बढ़ावा दें। यदि नगरीय निकाय अत्यधिक परावलंबी बने रहते हैं, तो यह एक गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास कार्य को कराते समय उसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके लिए आवश्यकतानुसार नमूना परीक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं भी अपनाई जाएं।
श्री पवैया ने कहा कि वित्तपोषण किसी एक व्यक्ति को समृद्ध बनाने के लिए नहीं, बल्कि समग्र विकास के उद्देश्य से किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस बार विकास की सतत एवं प्रभावी व्यवस्था हमारा मुख्य केंद्र बिंदु रहेगा। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण विषय है तथा नगरीय निकायों एवं पंचायतों को वित्तपोषित करने से पहले संस्थाओं में पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सोलर ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण एवं अन्य नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। पंचायतों एवं नगरीय निकायों को ग्यारहवीं एवं बाहरवीं अनुसूची से संबंधित कार्यों, विशेष रूप से पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक गतिविधियों एवं स्थानीय परंपराओं के संवर्धन को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को स्थानीय मेलों, स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि निकाय आयोग से अधिक वित्तीय सहयोग की अपेक्षा रखते हैं, तो उन्हें अपने कार्यों में गुणवत्ता एवं परिणाम भी सुनिश्चित करने होंगे। उन्होंने गोशालाओं के क्षेत्र में नवाचारों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जिस प्रकार ग्वालियर में लालटिपारा गौशाला आधारित सीएनजी परियोजना संचालित की जा रही है, उसी प्रकार की संभावनाएं मुरैना में भी विकसित की जा सकती हैं।

जनभागीदारी एवं नवाचार से होगा चंबल का समग्र विकास

राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि बैठक में प्राप्त सभी सुझाव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। चंबल जैसे बड़े संभाग एवं अंचल में, जहां अनेक चुनौतियां मौजूद हैं, वहां जनता को साथ लेकर कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी बढ़ाने एवं लोगों को जागरूक एवं प्रेरित करने की आवश्यकता है, जो केवल अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के आपसी समन्वय से ही संभव हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि लेखा परीक्षण की दृष्टि से सभी अभिलेख एवं आंकड़े व्यवस्थित एवं अद्यतन होना चाहिए, तभी पारदर्शी व्यवस्था एवं बेहतर बजट निर्माण संभव हो सकेगा। उन्होंने नवाचारों को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि यदि जनकल्याण करना है, तो नए प्रयोग एवं विकास के नए मॉडल अपनाने होंगे।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की पंचायतों को गोद लेकर वहां आदर्श विकास कार्य किए जा सकते हैं तथा आदर्श ग्राम पंचायतों के उदाहरण प्रस्तुत कर अन्य पंचायतों को भी प्रेरित किया जा सकता है। उन्होंने सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने, पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने तथा जिले की स्थानीय संस्कृति एवं जनजागृति को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष बल दिया।

राज्य वित्त आयोग के सदस्य श्री के.के. सिंह ने कहा है कि अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि समन्वय के साथ कार्य करें, तभी राजस्व वसूली को प्रभावी बनाया जा सकेगा और मुरैना का समग्र विकास संभव होगा।

उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों एवं पंचायतों में पदस्थ अधिकारियों को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी। साथ ही रिक्त पदों जैसी समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सोलर ऊर्जा एवं अन्य नवाचारों के क्षेत्र में थोड़े से प्रयासों से भी अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं केरल जैसे राज्यों में पंचायतों के विकास एवं आदर्श पंचायतों के सफल उदाहरणों से प्रेरणा लेकर स्थानीय निकायों को सशक्त बनाया जा सकता है।
राज्य वित्त आयोग के सदस्य सचिव श्री वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि नगरीय निकायों एवं पंचायतों की आय बढ़ाने के नए साधनों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्य इस प्रकार किए जाएं कि भविष्य में संस्थाएं आर्थिक रूप से अधिक सक्षम एवं आत्मनिर्भर बन सकें।
इस अवसर पर चंबल कमिश्नर श्री सुरेश कुमार, कलेक्टर मुरैना श्री लोकेश कुमार जांगिड़, कलेक्टर भिण्ड श्री किरोड़ी लाल मीना, श्योपुर कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मुरैना श्री कमलेश कुमार भार्गव, भिण्ड और श्योपुर जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं समस्त जिलों के नगरीय निकायों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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