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विशेष रिपोर्ट: 'श्री राम द्वादशी' को राष्ट्रीय उत्सव घोषित करने की मांग को लेकर दो साल पहले हुई थी अनूठी पहल

विशेष रिपोर्ट: 'श्री राम द्वादशी' को राष्ट्रीय उत्सव घोषित करने की मांग को लेकर दो साल पहले हुई थी अनूठी पहल
​कोलकाता: आज से दो साल पहले, मई 2024 में कोलकाता की निवासी मीकू सोनी ने एक अत्यंत भावुक और दृढ़ संकल्पित कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। उनका उद्देश्य 22 जनवरी को 'श्री राम द्वादशी' के रूप में राष्ट्रीय उत्सव घोषित करवाना था।
​क्या था पूरा मामला?
जनवरी 2024 में अयोध्या में भगवान श्री राम की प्राण-प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर को आधार बनाते हुए, मीकू सोनी ने इस तिथि को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना था। उन्होंने तर्क दिया था कि यह दिन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दिन है।
​अन्न त्याग का लिया था संकल्प
मीकू सोनी ने अपनी बात सरकार तक मजबूती से पहुँचाने के लिए एक कठोर संकल्प लिया था। उन्होंने घोषणा की थी कि जब तक वे प्रधानमंत्री से प्रत्यक्ष भेंट कर इस विषय पर चर्चा नहीं कर लेतीं, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगी। उनकी इस पहल ने उस समय काफी ध्यान आकर्षित किया था।
​प्रशासनिक और जन-जागरूकता के प्रयास
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उन्होंने इस विषय पर 10 मई 2024 को प्रधानमंत्री कार्यालय को औपचारिक पत्र प्रेषित किया था। इसके साथ ही, उन्होंने जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की द्वादशी को 'श्री राम द्वादशी प्रतिष्ठा दिवस' के रूप में मनाने की अनूठी पहल भी शुरू की थी।
​मीकू सोनी ने अपने पत्र के माध्यम से सरकार से इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और राष्ट्रहित में सकारात्मक निर्णय लेने का सादर अनुरोध किया था। यह घटना उस समय के सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी थी, जिसमें एक नागरिक ने अपने संकल्प के माध्यम से अपनी आस्था को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने का प्रयास किया था।

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