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वैश्विक मंदी के खतरे के बीच कैसे बचेगी भारतीय अर्थव्यवस्था?

वैश्विक युद्ध संकट, महंगे तेल, गिरते विदेशी बाजार और व्यापारिक तनाव के चलते वैश्विक मंदी की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य का तनाव बना रहता है तो 2008 जैसी आर्थिक मंदी दोबारा आ सकती है।

भारत के सामने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये पर दबाव, विदेशी निवेश में कमी, महंगाई और बेरोजगारी जैसे गंभीर खतरे मौजूद हैं। हाल ही में विदेशी मुद्रा भंडार में 8.1 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आर्थिक चिंता बढ़ी है। भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को स्थिर रखने के लिए डॉलर बेचकर रणनीति अपनाई है, जिसका लाभ भी हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आत्मनिर्भर भारत और Make in India पहल, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, डिजिटल इंडिया, ऊर्जा और तेल नीति भारत की आर्थिक मजबूती के अहम स्तंभ हैं। कृषि, छोटे उद्योगों को समर्थन, युवा आबादी और सरकारी निवेश भारत को वैश्विक मंदी के प्रभाव से बेहतर स्थिति में रख सकते हैं। यदि ये पहल मजबूत हों तो भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बना रह सकता है।

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