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शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और धर्मांतरण के दबाव को लेकर बालपुर में बढ़ा तनाव, मामला पहुंचा कलेक्टर और पुलिस के पास

सरसींवा/सारंगढ़-बिलाईगढ़। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बालपुर में एक शासकीय जमीन पर अवैध कब्जे और उसके बाद उपजे आपसी विवाद ने अब एक गंभीर रूप ले लिया है। एक तरफ जहां ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने एक व्यक्ति पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन पर जबरन कब्जा करने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी तरफ संबंधित परिवार ने कुछ स्थानीय रसूखदारों पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने और जान से मारने की धमकी देने का संगीन आरोप लगाया है। दोनों ही पक्षों की ओर से शिकायतें जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और तहसील कार्यालय तक पहुंच चुकी हैं।

पक्ष 1: ग्राम पंचायत और ग्रामीणों का आरोप – "फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकारी घास जमीन पर कब्जा"

ग्राम पंचायत बालपुर के सरपंच, पंचों और ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए शिकायती पत्र और पंचायत प्रस्ताव के अनुसार, मूल रूप से ग्राम पंडरीपाली का निवासी टीकाराम खूंटे (पिता नम्मू खूंटे) वर्तमान में बालपुर की शासकीय घास जमीन (खसरा नंबर 97/1, रकबा 6.949 हेक्टेयर का अंश भाग) पर अवैध रूप से मकान, बाड़ी और ठेला बनाकर काबिज है।

मुख्य बिंदु:

स्थगन आदेश (Stay Order) का उल्लंघन: न्यायालय तहसीलदार सरसींवा द्वारा 23 अप्रैल 2026 को (मामला क्रमांक 53/तह./वा./2026) के तहत टीकाराम खूंटे के निर्माण कार्य पर आगामी आदेश तक रोक लगाते हुए 'यथास्थिति' (Stay Order) बनाए रखने का आदेश जारी किया गया था।

पंचायत का आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि इस स्थगन आदेश के बावजूद टीकाराम और उसकी पत्नी भेषबाई ने वहां पर अपना मकान और बाड़ी पूरी तरह तैयार कर लिया।

फर्जी दस्तावेजों की शिकायत: ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उक्त व्यक्ति द्वारा फर्जी आधार कार्ड और निवास संबंधी फर्जी दस्तावेज तैयार कर बालपुर का निवासी बनने और जनगणना में नाम शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच कर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

पक्ष 2: पीड़ित परिवार का आरोप – "ईसाई धर्म अपनाने का दबाव और घर फूंकने की धमकी"

इस पूरे मामले में दूसरा मोड़ तब आया जब अनावेदक टीकाराम खूंटे की पत्नी श्रीमती भेषबाई खूंटे ने सारंगढ़ कलेक्टर (जनदर्शन) और थाना प्रभारी सरसींवा को लिखित शिकायत सौंपकर स्थानीय लोगों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए।

मुख्य बिंदु:

धर्मांतरण के लिए प्रताड़ना: भेषबाई का आरोप है कि गांव के ही सूर्यकुमार सायतोड़े (पिता देवचरण सायतोड़े) द्वारा उन पर और उनके पति पर लगातार ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला जा रहा है। रविवार को कैलेसिया (प्रार्थना सभा) में जाने के लिए मजबूर किया जाता है और मना करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती है।

घर और रोजी-रोटी छीनने की साजिश: शिकायत के अनुसार, जब उन्होंने धर्म बदलने से साफ मना कर दिया, तो सूर्यकुमार ने गुस्सा होकर उनके विरुद्ध रास्ता रोकने, ठेला हटाकर अतिक्रमण का फर्जी आवेदन तहसीलदार को देकर जेल भिजवाने और झोपड़ी (ठेले) में आग लगा देने की धमकी दी।

रसूखदारों की धौंस: भेषबाई ने अपनी शिकायत में कैलाश राय उर्फ चिंटू (पिता चंद्रिका राय) पर भी आरोप लगाया है कि उसने ₹10,000 की मांग की और खुद को पूर्व विधायक व संसदीय सचिव का भतीजा बताते हुए मंत्रालय तक पहुंच होने की धौंस दी तथा पूरा परिवार जिंदा जला देने की धमकी दी।

आरटीआई (RTI) के जरिए मांगी गई कार्रवाई की रिपोर्ट

विवाद की गंभीरता को देखते हुए आवेदिका भेषबाई खूंटे ने 21 मई 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) 2005 की धारा 6(1) के तहत जन सूचना अधिकारी/थाना प्रभारी सरसींवा के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया है। इसके माध्यम से उन्होंने दिनांक 08/05/2026 को सूर्यकुमार सायतोड़े और कैलाश राय के विरुद्ध की गई शिकायत पर पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की प्रमाणित प्रतिलिपि (Status Report) मांगी है।

प्रशासन की भूमिका और वर्तमान स्थिति

इस मामले में राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन दोनों के पास शिकायतें लंबित हैं:

राजस्व विभाग: तहसीलदार सरसींवा के न्यायालय में शासकीय भूमि खसरा नंबर 97/1 पर बेजा कब्जा हटाने का मामला प्रक्रियाधीन है।

पुलिस विभाग: पुलिस को सौंपे गए आवेदनों में मुख्यमंत्री, गृह मंत्रालय और पुलिस महानिदेशक रायपुर को भी प्रतिलिपि सूचनार्थ भेजी गई है, जिससे यह मामला प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।



ब्यूरो रिपोर्ट: आइमा मीडिया



नोट: इस रिपोर्ट में दिए गए तथ्य पूरी तरह से संलग्न दस्तावेजों (तहसीलदार आदेश दिनांक 23/04/2026, पंचायत प्रस्ताव, आरटीआई आवेदन दिनांक 21/05/2026 और पुलिस/कलेक्टर को दिए गए शिकायती पत्रों) पर आधारित हैं।

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