logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

उत्तराखंड देहरादून आज प्रातः लगभग 4 बजे जय_भारत_टीवी के निर्भीक पत्रकार भाई हेम_भट्ट_जी को पुलिस द्वारा घर से उठाना और उनकी पत्नी का फोन तक अपने साथ

उत्तराखंड देहरादून
आज प्रातः लगभग 4 बजे
जय_भारत_टीवी के निर्भीक पत्रकार भाई हेम_भट्ट_जी को पुलिस द्वारा घर से उठाना और उनकी पत्नी का फोन तक अपने साथ ले जाना केवल एक व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
सवाल यह है कि आखिर उत्तराखंड में पुलिस जनता की सुरक्षा कर रही है या सत्ता की सुरक्षा एजेंसी बन चुकी है?
क्या अब सच दिखाना अपराध हो गया है?
क्या पत्रकारिता का मतलब केवल सत्ता के सामने सिर झुकाना रह गया है?
जब-जब सत्ता डरती है, सबसे पहले कलम पर हमला होता है। क्योंकि सत्ता जानती है कि सच बोलने वाली आवाज जनता को जगाने की ताकत रखती है।
आज पूरी दुनिया भारतीय मीडिया को किस नजर से देख रही है, यह किसी से छिपा नहीं है। विदेशों में कई मंचों पर भारतीय मीडिया की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सवाल उठ चुके हैं। नॉर्वे की वह घटना भी देश नहीं भूला, जब एक सामान्य विदेशी पत्रकार ने भारतीय मीडिया की कार्यशैली का मजाक उड़ाते हुए हमारे देश की छवि और यहाँ तक कि प्रधानमंत्री तक का अपमान करने का दुस्साहस किया। यह केवल किसी व्यक्ति का अपमान नहीं था, बल्कि उस मीडिया व्यवस्था पर सवाल था जो सत्ता से सवाल पूछने के बजाय अक्सर सत्ता की ढाल बनती दिखाई देती है।
दुर्भाग्य यह है कि आज भारत की मीडिया का एक बड़ा हिस्सा जनता की आवाज बनने के बजाय “प्रायोजित राष्ट्रवाद” और “सत्ता भक्ति” का प्रतीक बनता जा रहा है। जो पत्रकार सरकार से सवाल पूछते हैं, उन पर मुकदमे, दबाव, धमकी और गिरफ्तारी—यही आज का नया लोकतांत्रिक मॉडल बना दिया गया है।
उत्तराखंड में लगातार बढ़ती दमनकारी घटनाएँ बेहद चिंता का विषय हैं। रात के अंधेरे में पत्रकारों को उठाना यह साबित करता है कि सरकार आलोचना से बौखला चुकी है। जो शासन सवालों से डरने लगे,

157
4031 views

Comment