लखनऊ हाईकोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण पर महत्वपूर्ण आदेश दिया
लखनऊ: हाईकोर्ट ने राजेश कुमार सिंह की याचिका पर यह स्पष्ट किया कि केवल लंबित मुकदमों के आधार पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि लाइसेंस रद्द करने से पहले सक्षम प्राधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि हथियार का बने रहना सार्वजनिक शांति या जन सुरक्षा के लिए वास्तविक खतरा है।
हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 में डीबीबीएल गन लाइसेंस निरस्तीकरण और 2008 में अपील खारिज करने के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए लाइसेंसिंग प्राधिकारी के पास भेजा है। याचिकाकर्ता के खिलाफ तीन आपराधिक मामले थे, जिनमें से एक में वह बरी हो चुके हैं, दूसरे मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट दाखिल की है और तीसरे में उन्हें जमानत मिली है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी मामले में लाइसेंसधारी के हथियार के दुरुपयोग का कोई आरोप नहीं है।