इस्लाम ने सदियों पहले औरत को वह खुदमुख्तारी और हक़ूकु दिए, जिसकी मिसाल दुनिया के किसी और निज़ाम में नहीं मिलती। निकाह के मामले में औरत की रज़ामंदी को
इस्लाम ने सदियों पहले औरत को वह खुदमुख्तारी और हक़ूकु दिए, जिसकी मिसाल दुनिया के किसी और निज़ाम में नहीं मिलती। निकाह के मामले में औरत की रज़ामंदी को सबसे बुलंद मर्तबा देना ही इस्लाम का हुस्न और उसका अदल है। यह इस बात का वाज़ेह सुबूत है कि इस्लाम औरत की अज़मत और उसकी ख़ुशी का कितना बड़ा पासबां है।