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मध्यप्रदेश में फाइनेंस एजेंटों द्वारा वाहन जब्ती का विवाद

मध्यप्रदेश : खरगोन जिले में फाइनेंस एजेंटों द्वारा वाहन जब्ती और वसूली के विवाद ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महेश्वर निवासी संजय तन्सोरे ने आरोप लगाया कि वे एलएलबी परीक्षा देने आए थे, लेकिन परीक्षा केंद्र के निकट उनकी पत्नी के नाम की फाइनेंस एक्टिवा को दर्जनभर एजेंटों ने जबरन घेरकर छीन लिया। इसके बाद वाहन छोड़ने के लिए बकाया किश्त के अतिरिक्त साढ़े पांच हजार रुपए सीजिंग चार्ज मांगा गया। संजय ने पुलिस में शिकायत की, लेकिन एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें समझौते का सुझाव दिया गया।

गोगावां निवासी हमीद खान का मामला भी इसी तंत्र की पोल खोलता है जहां उनके वाहन को धोखे से छीन लिया गया और पुलिस कार्रवाई से वंचित रहना पड़ा। उन्होंने वर्षों तक पुलिस, आरटीओ, कोर्ट और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगाए, लेकिन न्याय नहीं मिल पाया। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बावजूद छोटे शहरों में निजी फाइनेंस एजेंट सड़क पर वाहन उठाने का खेल जारी है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। पुलिस थानों में शिकायतों के समाधान की बजाय समझौते का दबाव बनना इस व्यवस्था की समस्या को और बढ़ा रहा है।

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