यूपी पुलिस के सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने निलंबन के बाद एक वीडियो जारी कर अपनी बात रखी है। वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ इसलिए सस्पेंड किया
यूपी पुलिस के सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने निलंबन के बाद एक वीडियो जारी कर अपनी बात रखी है। वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ इसलिए सस्पेंड किया गया क्योंकि वे पुलिस विभाग में पारदर्शिता, सुधार और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
सुनील शुक्ला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जनता से अपील करते हुए कहा कि वे जानना चाहते हैं आखिर उनका कसूर क्या है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी सरकार विरोधी काम नहीं किया, बल्कि बिना अतिरिक्त बजट खर्च किए पुलिस व्यवस्था को बेहतर और पारदर्शी बनाने की बात कही थी।
वीडियो में उन्होंने पुलिस विभाग में “दोहरी नीति” होने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि छोटे कर्मचारियों पर तुरंत कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन राजपत्रित अधिकारियों और बड़े पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ कोई सख्ती नहीं होती। उन्होंने कहा कि कुछ पुलिसकर्मियों को रील्स या मनोरंजन वाले वीडियो बनाने पर सस्पेंड कर दिया जाता है, जबकि बड़े अधिकारी नियमों से ऊपर की तरह व्यवहार करते हैं।
सुनील शुक्ला ने यह भी कहा कि पुलिस विभाग के अंदर दमनकारी माहौल बनाया जा रहा है, जहां सच बोलने वालों को दबाने की कोशिश होती है। उनके मुताबिक उन्होंने सिर्फ भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं को उजागर करने की कोशिश की, लेकिन इसके बदले उन्हें निलंबित कर दिया गया।
वीडियो में उन्होंने दावा किया कि उन्हें जनता और सोशल मीडिया पर काफी समर्थन मिल रहा है, लेकिन इसके बावजूद शासन और विभाग उनकी बात सुनने के बजाय कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने अपने निलंबन को “सत्य की हार” बताते हुए कहा कि वे झुकने वाले नहीं हैं और सत्य व न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे।
वीडियो के अंत में सुनील शुक्ला ने कहा कि अगर सच बोलना अपराध है, तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने “जय हिंद” और “वंदे मातरम्” के साथ अपना संदेश समाप्त किया।
अब सोशल मीडिया पर लोग इस मुद्दे पर लगातार बहस कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या भ्रष्टाचार और व्यवस्था पर सवाल उठाने वालों के साथ ऐसा व्यवहार होना
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