भारत और विश्व में बढ़ती मंदी पर वैज्ञानिक विश्लेषण
विश्व: दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय बड़े बदलाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक विकास दर लगभग 3.1% रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्षों से कम है। युद्ध, महंगाई, बेरोजगारी, सप्लाई चेन संकट, बढ़ते कर्ज और व्यापारिक तनाव को मंदी के मुख्य कारण बताया गया है। अमेरिका और यूरोप में महंगाई कम करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई गई हैं, जिससे उद्योगों और छोटे व्यापारों पर दबाव बढ़ा है। चीन की उत्पादन गति धीमी होने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
भारत: IMF के अनुसार भारत की GDP वृद्धि 2026 में लगभग 6.5% से 7.3% तक रहने की संभावना है, जो इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करता है। हालांकि, रुपये की कमजोरी, आयातित तेल पर निर्भरता, बेरोजगारी, किसानों की लागत में वृद्धि और छोटे उद्योगों की धीमी वृद्धि चिंता का विषय हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि वैश्विक युद्ध या व्यापारिक संकट बढ़ने पर भारत की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। आर्थिक सुधार के लिए स्थानीय उत्पादन, कृषि व छोटे व्यापारों को मजबूत करना, नई तकनीक और स्किल ट्रेनिंग, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी हैं।