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राजा भोज एवं उनकी भोजशाला

ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती ।
भारतीय दार्शनिक परंपरा में ज्ञान को जीवन का सर्वोच्च आलोक माना गया हैं और इस आलोक की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती हैं । वे केवल विद्या की प्रदायिनी नही , बल्कि मानव चेतना में विवेक , बोध एवं आत्मबोध को जागृत करनेवाली दिव्य सत्ता हैं । उनकी आराधना करना हैं - अज्ञान के अंधकार से मुक्ति और सत्य के प्रकाश की और अग्रसर होना । ज्ञान , बुद्धी , प्रतिभा , स्मरण शक्ति , चेतना , विवेक , सात्विकता , औचित्य , बोध , वाणी , भाषण शक्ति , संगीत , स्वर , विद्या , प्रतँत्युत्पन्नमतित्व , लेखन , काव्य - सृजन , तर्क - शक्ति , विचार - शक्ति , धारना - शक्ति , अनुसंधान - क्षमता , कल्पना और सम्वेदना जैसे गुणों की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती माँ हैं । वस्तुत: ये संसार की चेतना शक्ति की स्वामिनी हैँ ।
राजा भोज एवं उनकी भोजशाला
अद्य धारा सदा धारा सदालम्बा सरस्वती ।
पण्डिता मण्डिता सर्व भोज राजे भुवं गते ।।

साधितं , विदितं , दत्तं , ज्ञातं तद् यन्न केनचित ।
किमन्यत् कविराजस्य श्री भोजस्य प्रशस्ते ।।
भारतीय संस्कृति में श्रध्दालु , उपासक पूजा , अर्चना एवं स्तुति करने पर बौद्धिक - शक्ति प्रतिभा से अवश्य ही सम्पन्न हो जाता हैं ।
सरस्वती मया दृष्ट्वा वीणा पुस्तक धारिणीं ।
हंसवाहनसंयुक्ता विद्यादानम् करोतु मे ।।

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