जळगांव कांग्रेस में बगावत की चिंगारी!
नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पर फूटा गुस्सा, पुराने वफादार नेताओं के इस्तीफे की तैयारी
जळगांव: महाराष्ट्र के जलगांव जिले में कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बार फिर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आने लगी है। हाल ही में घोषित किए गए तीन नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद पार्टी के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई पदाधिकारी अब अपने पदों से इस्तीफा देने की तैयारी में हैं।
धरणगांव कांग्रेस के तालुकाध्यक्ष डॉ. वी. डी. पाटील ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए साफ कहा है कि “ऊपर से थोपे गए जिलाध्यक्ष हमें मंजूर नहीं हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में न तो सामाजिक संतुलन का ध्यान रखा गया
और न ही वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे जमीनी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया।
दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने जळगांव पूर्व के लिए धनंजय चौधरी, जळगांव पश्चिम के लिए अविनाश भालेराव और जळगांव शहर के लिए जमील शेख को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है
लेकिन इन नियुक्तियों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की लहर तेज हो गई है।
डॉ. पाटील ने अपने बयान में कहा कि पार्टी नेतृत्व को यह बताना चाहिए कि आखिर किन मापदंडों के आधार पर इन नेताओं का चयन किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि नियुक्ति से पहले किस प्रकार का मूल्यांकन किया गया और इन नामों की सिफारिश किसने की।
उन्होंने पार्टी की कार्यप्रणाली पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस में अब जमीनी कार्यकर्ताओं की कोई कद्र नहीं बची है। जो लोग वर्षों से तन, मन और धन से पार्टी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि संगठन के लिए कोई विशेष योगदान न देने वालों को बड़े पद दिए जा रहे हैं।
डॉ. पाटील ने कहा कि
“देश और पार्टी के लिए हमने अपना खून-पसीना बहाया, लेकिन अब लगता है कि पार्टी सुधार करना ही नहीं चाहती। निर्णय बंद कमरों में लिए जा रहे हैं और जमीनी कार्यकर्ताओं से संवाद पूरी तरह खत्म हो चुका है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व वास्तविकता से दूर हो चुका है और संगठन में बढ़ती गुटबाजी कांग्रेस को कमजोर कर रही है। इस बयान के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, कई अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी पार्टी नेतृत्व से नाराज़ हैं और जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी स्थानीय स्वराज्य संस्था चुनावों से पहले कांग्रेस में बढ़ता यह असंतोष पार्टी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है।
जळगांव में कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत बढ़ाने के बजाय नई नियुक्तियों ने पार्टी के अंदर मतभेद और अधिक गहरा दिए हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इस बढ़ते विद्रोह को कैसे संभालता है।