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जश्न-ए-वारिस-ए-पाक की रूहपरवर महफ़िल से काईमऊ हुआ जगमग

काईमऊ/हरदोई/उ०प्र०
कस्बा काईमऊ की सरज़मीं उस वक़्त नूरानी कैफ़ियत में डूब गई, जब जश्न-ए-वारिस-ए-पाक बड़े ही अदब, एहतराम और सूफियाना शान-ओ-शौकत के साथ आयोजित किया गया। महफ़िल में अकीदतमंदों और चाहने वालों की बड़ी तादाद मौजूद रही, जहाँ दरूद-ओ-सलाम और नात-ओ-मनाक़िब की सदाओं ने पूरे माहौल को इश्क़-ए-रसूल ०ﷺ और रंग-ए-विलायत से महका दिया।
इस रूहानी और पुरनूर महफ़िल की सरपरस्ती मशहूर सूफी शख्सियत आशिक शाह वारसी साहब ने फरमाई, जिनकी निगरानी में कार्यक्रम बेहद कामयाब और असरदार रहा।।
महफ़िल में खुसूसी ख़िताब के लिए तशरीफ़ लाए मशहूर आलिम-ए-दीन मौलाना अबरार हुसैन वारसी साहब ने अपने इल्मी, इख़लाक़ी और सूफियाना बयान से हाज़िरीन के दिलों को रौशन कर दिया। आपने औलिया-ए-किराम की तालीमात, मोहब्बत, इंसानियत और दीन-ए-इस्लाम की अहमियत पर बेहद खूबसूरत अंदाज़ में रोशनी डाली।
वहीं, खुश-आवाज़ हाफिज कारी मोहम्मद शकील वारसी साहब खतीब ईमाम चिश्तिया मस्जिद राजा विहार लखनऊ ने नात-ओ-मनक़बत पेश कर महफ़िल को इश्क़-ओ-अक़ीदत के रंग में रंग दिया। उनकी पुरसोज़ आवाज़ ने महफ़िल में मौजूद लोगों की आँखों को नम और दिलों को मुतास्सिर कर दिया।
महफ़िल के आखिर में मुल्क-ओ-मिल्लत की सलामती, अमन-ओ-अमान और आपसी भाईचारे के लिए ख़ुसूसी दुआ कराई गई।
जश्न-ए-वारिस-ए-पाक की यह शानदार और यादगार महफ़िल लोगों के दिलों में देर तक अपनी रूहानी खुशबू बिखेरती रहेगी!!

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