कटरा: प्रकृति संरक्षण व विकास पर आदिवासी समाज आंदोलनों पर चर्चा तेज!!
कटरा/शाहजहाँपुर: कटरा नगर पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव प्रक्रिया 07 मई 2026 के बाद बुद्धिजीवी जनता और आदिवासी समाज ने जीवन व प्रकृति बचाने के लिए आंदोलन तेज किया है। पहाड़ों और जंगलों को बचाने हेतु सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार बढ़ा है और जंगलों, पहाड़ों के संरक्षण के लिए आदिवासी समाज सक्रिय हैं, जिसका प्रभाव स्थानीय जनता की चर्चाओं में देखा जा रहा है।
राजीव दीक्षित, देवेंद्र बल्हारा, सुभाष चंद्र बोस, और जय गुरुदेव जैसे विचारकों के समर्थक मानते हैं कि राजनीतिक दल अलग हो सकते हैं पर विकास का मॉडल लगभग समान रहा है। औद्योगिक विकास, पूंजीवाद, और GDP आधारित विकास मॉडल ने प्रकृति को नुकसान पहुंचाया है। इस पर विचार करते हुए सस्टेनेबल डेवलपमेंट और प्रकृति-आधारित जीवनशैली की ओर लौटने की मांग बढ़ रही है। आदिवासी और वन्य समाज से "जितनी जरूरत उतना ही उपयोग" और प्रकृति को "माता" मानने जैसी सीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विकास और प्रकृति संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए स्थानीय जागरूकता, अनावश्यक उपभोग में कमी, पेड़-पानी-जमीन की रक्षा, तथा ग्राम आधारित आत्मनिर्भर मॉडल को प्राथमिकता देने की जरूरत है। यह बहस केवल सरकार की नहीं बल्कि जनता की भी अहम जिम्मेदारी है कि विकास किसके लिए और किस कीमत पर हो।