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व्यवहार में बदलाव लाना जलवायु परिवर्तन का सबसे सशक्त समाधान- प्रो अनीस अहमद


व्यवहार में बदलाव लाना जलवायु परिवर्तन का सबसे सशक्त समाधान- प्रो अनीस अहमद

जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा समाधान मानवीय निर्णयों में निहित- डॉ अनुरंजन

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के पीजी मनोविज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो अनीस अहमद के कुशल नेतृत्व में "मानव व्यवहार पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव" विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रो अनीस अहमद ने विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आजकल की एक ज्वलंत समस्या है। मूल रूप से जलवायु परिवर्तन हमारे मानवीय व्यवहार और समग्र मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है, जिससे चिंता, तनाव आदि जैसे मानसिक विकार उत्पन्न होते हैं। इसके अलावा प्रो अनीस ने इस बात पर भी जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन हमारे दैनिक जीवन की गतिविधियों को भी प्रभावित करता है।
विषय विशेषज्ञ के रूप में भूगोल विभाग के अध्यक्ष डॉ अनुरंजन ने अपने व्याख्यान में बताया कि जलवायु परिवर्तन से मौसम की चरम स्थितियों और बदलते परिवेश के कारण मानवीय व्यवहार में बदलाव लाता है। उच्च तापमान से आक्रामकता, अपराध और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में वृद्धि होती है। वहीं, लंबे समय तक चलने वाले सूखे और लू जैसी धीमी गति से बढ़ने वाली आपदाएँ सामुदायिक भागीदारी को कम करती हैं, सामाजिक अलगाव को बढ़ाती हैं और व्यापक पर्यावरणीय चिंता और विस्थापन को जन्म देती हैं। डॉ अनुरंजन ने अपने सम्बोधन में ये भी बताया कि तापमान में मामूली वृद्धि भी हिंसक अपराध, घरेलू दुर्व्यवहार और अंतर-व्यक्तिगत संघर्ष की दरों को सीधे तौर पर बढ़ा देती है। मानसिक स्वास्थ और संज्ञानात्मक गिरावट तीव्र जैसे बाढ़, चक्रवात जो प्रभावित समुदायों में पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी), चिंता और अवसाद का कारण बनती हैं। डॉ अनुरंजन ने अपने सम्बोधन में इस बात पर भी जोर दिया कि धीरे-धीरे होने वाले पर्यावरणीय परिवर्तन और बिगड़ती वायु गुणवत्ता दीर्घकालिक तनाव, संज्ञानात्मक हानि और ग्रह के भविष्य के बारे में शक्तिहीनता या शोक की व्यापक भावना में योगदान करते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उच्च बाहरी तापमान और लू चलने से मनोदशा संबंधी विकार और सिज़ोफ्रेनिया के लिए अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जाती है। डॉ अनुरंजन ने अपने सम्बोधन में इस बात पर भी चर्चा किया कि लू और खराब वायु गुणवत्ता लोगों को घर के अंदर रहने के लिए मजबूर करती है, जिससे सामुदायिक मेलजोल कम हो जाता है और स्थापित सामाजिक सहायता नेटवर्क को नुकसान पहुंचता है।
इस संगोष्ठी में सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो ध्रुव कुमार, डॉ दिवेश कुमार शर्मा, अमृत कुमार झा एवं डॉ निशात शाहीन ने भी जलवायु परिवर्तन के मनोवैज्ञानिक कल्याण पर पड़ने वाले प्रभाव पर अपने विचार रखे।
इस संगोष्ठी में सामाजिक विज्ञान के विभिन्न विभागों के बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे। पूरे कार्यक्रम का संचालन डॉ निशात शाहीन ने किया और अंत में उन्होंने धन्यवाद ज्ञापन भी दिया।

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