मुंबई के डब्बावालों से प्रभावित हुए हेमंत सोरेन, झारखंड में सेंट्रल किचन मॉडल पर मंथन
महाराष्ट्र प्रवास के दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने मुंबई महानगर के प्रसिद्ध डब्बावालों से मुलाकात कर उनकी अनुशासित कार्यशैली और सेवा प्रणाली को करीब से समझा। इस मुलाकात में डब्बावालों की समयपालन, सटीकता और बिना किसी आधुनिक तकनीक के लाखों टिफिन सही स्थान तक पहुँचाने की व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबई के डब्बावाले केवल भोजन पहुँचाने का काम नहीं करते, बल्कि वे मेहनत, अनुशासन और भरोसे की जीवंत मिसाल हैं। दशकों से वे घर का शुद्ध और ताज़ा भोजन कर्मचारियों तक समय पर पहुँचाकर सेवा भावना का परिचय दे रहे हैं। उनकी कार्यप्रणाली दुनिया भर में ‘सिक्स सिग्मा’ स्तर की दक्षता के लिए जानी जाती है।
झारखंड में शुरू हो सकता है सेंट्रल किचन मॉडल
बैठक के दौरान झारखंड के विभिन्न व्यस्त शहरों में “सेंट्रल किचन” शुरू करने के विषय पर भी गंभीर चर्चा हुई। इस योजना का उद्देश्य कामगारों, कार्यालय कर्मचारियों और हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों को समय पर स्वच्छ, पौष्टिक और सस्ता भोजन उपलब्ध कराना बताया गया।
सरकार का मानना है कि यदि मुंबई के डब्बावालों की कार्यप्रणाली को झारखंड में लागू किया जाता है, तो इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों को बेहतर भोजन सुविधा मिल सकेगी।
अनुशासन और सेवा भावना की मिसाल हैं मुंबई के डब्बावाले
मुंबई के डब्बावाले अपनी अनोखी कोडिंग प्रणाली, आपसी समन्वय और लोकल ट्रेनों के माध्यम से प्रतिदिन लाखों टिफिन सही जगह तक पहुँचाते हैं। खास बात यह है कि इतने बड़े नेटवर्क के बावजूद उनकी गलती की संभावना बेहद कम मानी जाती है। यही कारण है कि उनकी कार्यशैली को दुनिया के बड़े मैनेजमेंट संस्थानों में भी अध्ययन का विषय बनाया गया है।
इस अवसर पर Kalpana Murmu Soren सहित महाराष्ट्र महिला एवं बाल विकास समिति के सम्मानित सदस्य भी मौजूद रहे।
जनता की राय भी अहम
झारखंड में यदि सेंट्रल किचन और डब्बावाला जैसी सेवा शुरू होती है, तो इससे कामकाजी लोगों और छात्रों को काफी राहत मिल सकती है। हालांकि, लोगों का मानना है कि योजना को सफल बनाने के लिए भोजन की गुणवत्ता, समयबद्ध वितरण और किफायती दरों पर विशेष ध्यान देना होगा।
अब देखना होगा कि मुंबई का यह सफल मॉडल झारखंड में किस रूप में लागू होता है और आम जनता को इससे कितना लाभ मिल पाता है।