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आजाद नगर रोड नंबर-15 में गर्भवती महिला को धूप में खड़ा रखने पर उठा सवाल

जमशेदपुर के आजाद नगर रोड नंबर-15 में बुधवार को एक बेहद चिंताजनक और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। जानकारी के अनुसार, एक गर्भवती महिला अस्पताल से लौट रही थी, तभी ट्रैफिक पुलिस ने जांच के दौरान उसके वाहन को रोक लिया। वाहन के लगभग सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे, केवल प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) की वैधता कुछ दिन पहले समाप्त हुई थी।
आरोप है कि मामूली दस्तावेजी कमी के बावजूद गर्भवती महिला को भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में लंबे समय तक खड़ा रखा गया, ताकि चालान की प्रक्रिया पूरी की जा सके। इस दौरान महिला की शारीरिक स्थिति और स्वास्थ्य को लेकर किसी प्रकार की संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक गर्भवती महिला केवल एक नागरिक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी की वाहक होती है। ऐसे समय में उसकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान की जिम्मेदारी समाज और प्रशासन दोनों की होती है। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या कानून का पालन करवाने के नाम पर मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर देना उचित है?
घटना के बाद इलाके में प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि कानून के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों के मामलों में संवेदनशील व्यवहार अपेक्षित होता है।
विडंबना यह है कि एक ओर राज्य सरकार लगातार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण की बातें करती है, वहीं दूसरी ओर यदि गर्भवती महिलाओं को भीषण धूप में खड़ा कर औपचारिकताएं पूरी कराई जाती हैं, तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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