मजदूर मां की बेटी बनी अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर, गोल्ड मेडल जीत बढ़ाया देश का मान
चंडीगढ़ के मख्खन माजरा इलाके की रहने वाली सुन्ना देवी ने गरीबी और कठिन हालात के बावजूद अपनी बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया। खेतों में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाली सुन्ना देवी ने आर्थिक तंगी के बीच भी बेटी को बॉक्सिंग की ट्रेनिंग दिलाई।
मां की मेहनत और बेटी के जुनून का ही नतीजा रहा कि बेटी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीतकर देश और परिवार का नाम रोशन कर दिया।
सुन्ना देवी की संघर्ष भरी कहानी आज उन सभी माता-पिताओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करते हैं।
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