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शाहजहांपुर ::जनता के बीच विशेष तौर पर निम्न व मध्य वर्गीय जनता के बीच चिंता व विभिन्न भ्रम!! भारत में सुपर एल नीनो के कारण गर्मी और सूखे का खतरा

भारत इस समय सुपर एल नीनो की संभावित घटना की वजह से एक गंभीर मौसमीय संकट की ओर बढ़ रहा है। वैज्ञानिक और मौसम एजेंसियाँ चेतावनी दे रही हैं कि अगर यह स्थिति मजबूत होती है तो इसका प्रभाव केवल तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मानसून, खेती, जल संकट, बिजली की मांग, खाद्य कीमतें और करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी गहरा असर पड़ेगा। Super El Niño प्रशांत महासागर में पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की प्राकृतिक घटना है, जो वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करती है।

भारत में मानसून की जटिल समुद्री-हवायी प्रणालियाँ El Niño के दौरान कमजोर हो सकती हैं जिससे बारिश कम या असमान हो सकती है। इससे सूखे की स्थिति बढ़ सकती है और कुछ क्षेत्रों में अचानक भारी बारिश हो सकती है। वैज्ञानिकों की चिंता इस बात पर भी है कि यह घटना जलवायु परिवर्तन के प्रभाव में और भी तीव्र हो सकती है। 2026 को संभावित रूप से सबसे गर्म वर्षों में से एक माना जा रहा है। भारत के कई राज्य पहले ही 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास तापमान का अनुभव कर रहे हैं, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और गरीबों की स्थिति गंभीर हो सकती है।

मानसून कमजोर पड़ने पर खेती पर बड़ा असर पड़ेगा, धान और दालों का उत्पादन घट सकता है, सिंचाई संकट बढ़ सकता है और खाद्य कीमतें बढ़ सकती हैं। शहरों में भी Heatwave के कारण बिजली और पानी की मांग बढ़ेगी तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ेगा। जलवायु वैज्ञानिक मानते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण भविष्य में ऐसी घटनाएँ और तीव्र हो सकती हैं। Super El Niño केवल मौसम की घटना नहीं बल्कि मानव जीवन, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

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