अतिक्रमण की खबर छपते ही पत्रकार को मिली जान से मारने की धमकी, खातौली थाने में मुकदमा दर्ज
सच की आवाज दबाने की कोशिश
अतिक्रमण की खबर छपते ही पत्रकार को मिली जान से मारने की धमकी, खातौली थाने में मुकदमा दर्ज
अगर पत्रकार सुरक्षित नहीं, तो जनता की आवाज कौन उठाएगा
प्रशासनिक कार्रवाई की खबर से बौखलाए कथित अतिक्रमणकारी, फोन पर दी धमकी, रिकॉर्डिंग पुलिस के पास
कोटा जिले की इटावा पीपल्दा तहसील क्षेत्र में पत्रकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। इटावा खातौली क्षेत्र के संवाददाता ब्रजराज मीणा को कथित अतिक्रमणकारियों द्वारा फोन पर जान से मारने की धमकी दिए जाने का मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में प्रशासनिक अधिकारी गांव आडागेला हरीनगर, पोस्ट ढीपरी चंबल क्षेत्र में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे। इस कार्रवाई की खबर पत्रकार ब्रजराज मीणा द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित की गई। खबर सामने आते ही कथित अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया और आरोप है कि उन्होंने पत्रकार को फोन कर खुलेआम जान से मारने की धमकी दे डाली।
मामले में रामेश्वर मीणा पुत्र हीरालाल, उसका बेटा पवन, रामगोप मीणा, उसका बेटा जितेंद्र उर्फ गोलू मीणा तथा सियाराम मीणा के नाम सामने आए हैं। पत्रकार के अनुसार धमकी की पूरी रिकॉर्डिंग उनके पास सुरक्षित है, जिसे खातौली पुलिस को सौंप दिया गया है। इसके बाद खातौली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
सच लिखोगे तो जान से मार देंगे
यह घटना केवल एक पत्रकार को धमकाने का मामला नहीं बल्कि लोकतंत्र की आवाज को डराने और दबाने की कोशिश मानी जा रही है। जिस पत्रकार का काम जनता की समस्याओं, भ्रष्टाचार, अवैध कब्जों और प्रशासनिक कार्यवाही को सामने लाना है, यदि उसी को धमकियां मिलने लगें तो आम आदमी की लड़ाई कौन लड़ेगा ?
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अवैध अतिक्रमण और दबंगई के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करता है, लेकिन जब उसी कार्रवाई की खबर प्रकाशित होने पर पत्रकारों को निशाना बनाया जाए तो यह बेहद गंभीर विषय है।
पुलिस पर टिकी जनता की नजर
खातौली थाना प्रभारी सीआई देसराज गुर्जर ने बताया कि रिपोर्ट प्राप्त हुई है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि रिकॉर्डिंग सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन अब क्षेत्र की जनता और पत्रकार संगठनों की नजर पुलिस प्रशासन पर टिक गई है। लोगों का कहना है कि यदि धमकी देने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो इससे अपराधियों और दबंगों के हौसले और बुलंद होंगे।
पत्रकार संगठनों में रोष
घटना के बाद पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखा जा रहा है। कई लोगों ने इसे सच्ची पत्रकारिता पर हमला बताते हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि आज पत्रकार को धमकी दी जा रही है, कल आम नागरिक की आवाज भी इसी तरह दबाई जाएगी। इसलिए इस मामले में कड़ी कार्रवाई जरूरी है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति कानून और मीडिया को चुनौती देने की हिम्मत न कर सके।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आखिर कब तक डराया जाएगा ?
राजस्थान सहित पूरे देश में लगातार पत्रकारों पर हमले, धमकियां और दबाव की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब सच दिखाना और भ्रष्टाचार उजागर करना भी खतरे से खाली नहीं रहा ?
यदि प्रशासन और कानून व्यवस्था समय रहते ऐसे मामलों में सख्त कदम नहीं उठाती, तो यह संदेश जाएगा कि दबंगई और धमकियों के दम पर सच को दबाया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि खातौली पुलिस इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करती है।