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बलिया से देवरिया तक शिक्षा विभाग में मचा हड़कं, एक ही व्यक्ति हाईस्कूल पास एक 1993 दूसरा 2003 में दोनों में जन्मतिथि में अंतर फिर भी सरकारी नौकरी वो भी मास्ट कि!

बलिया से देवरिया तक शिक्षा विभाग में मचा हड़कं, एक ही व्यक्ति हाईस्कूल पास एक 1993 दूसरा 2003 में दोनों में जन्मतिथि में अंतर फिर भी सरकारी नौकरी वो भी मास्ट कि!


बलिया। उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने भर्ती प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बलिया निवासी एक शिक्षक ने अलग-अलग जन्मतिथियों पर दो बार हाईस्कूल परीक्षा पास की और कथित फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल कर ली।



मामले के अनुसार ग्राम गौरी, पोस्ट ननहुल, जिला बलिया निवासी दिनेश कुमार यादव पुत्र श्री चंद्रदेव यादव वर्तमान में देवरिया जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत बताए जा रहे हैं।

आरोप है कि दिनेश कुमार यादव ने पहली बार जनता इंटर कॉलेज नवानगर, बलिया से वर्ष 1993 में हाईस्कूल परीक्षा अनुक्रमांक 1017537 से उत्तीर्ण की थी, जिसमें उनकी जन्मतिथि 10 जुलाई 1979 दर्ज थी। इसके बाद कथित रूप से दूसरी बार फिर उसी जनता इंटर कॉलेज से वर्ष 2004 में हाईस्कूल परीक्षा अनुक्रमांक 2286869 से पास की गई, जिसमें जन्मतिथि 1 जुलाई 1987 दर्शाई गई।



यानी एक ही व्यक्ति के दो हाईस्कूल प्रमाणपत्र और दोनों में करीब 8 साल का अंतर!



मामले ने तूल तब पकड़ा जब शिकायतकर्ता कुंवर सौरभ प्रताप यादव ने माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत को गंभीर मानते हुए परिषद ने जिला विद्यालय निरीक्षक बलिया से जांच रिपोर्ट तलब की। परिषद द्वारा जारी द्वितीय स्मरण पत्र में संबंधित अभिलेखों की जांच कर विस्तृत आख्या भेजने के निर्देश दिए गए थे।



जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ने जांच की जिम्मेदारी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़सरी, बलिया के प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार श्रीवास्तव को सौंपी। जांच अधिकारी द्वारा जनता इंटर कॉलेज नवानगर में किए गए भौतिक सत्यापन में कथित रूप से यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2004 में हाईस्कूल परीक्षा फर्जी तरीके से उत्तीर्ण की गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि जूनियर हाई स्कूल सिकंदरपुर, बलिया के कथित कूटरचित एवं फर्जी आठवीं पास ट्रांसफर सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया गया।



सबसे बड़ा सवाल अब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। आखिर दो अलग-अलग जन्मतिथियों वाले प्रमाणपत्रों के बावजूद विभागीय सत्यापन में यह मामला वर्षों तक दबा कैसे रहा?



क्या भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच सिर्फ कागजों तक सीमित थी?



जिला विद्यालय निरीक्षक बलिया ने 14 मई 2026 को अपनी जांच आख्या अपर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी को भेज दी है। अब प्रमाणपत्र निरस्तीकरण, नौकरी समाप्ति और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज मानी जा रही है।



अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला सिर्फ एक शिक्षक का नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग में वर्षों से चल रहे फर्जीवाड़े और सत्यापन प्रणाली की पोल खोलने वाला बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।



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