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उत्तराखंड ने खोया अपना सख्त लेकिन ईमानदार जननेता, पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूरी का निधन

उत्तराखंड की राजनीति और सार्वजनिक जीवन से मंगलवार को एक युग का अंत हो गया। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूरी का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और देहरादून के मैक्स हॉस्पिटल में उनका उपचार जारी था। उनकी बेटी और उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण ने उनके निधन की पुष्टि की।

जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह लगभग 11:10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि उनकी तबीयत पिछले कई दिनों से लगातार नाजुक बनी हुई थी। कुछ समय पहले उन्हें वेंटिलेटर से हटाकर आईसीयू ऑब्जर्वेशन में रखा गया था, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हार्ट अटैक को निधन की वजह माना जा रहा है।

सेना से राजनीति तक अनुशासन और सादगी की मिसाल:
1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी भारतीय सेना में लगभग 35 वर्षों तक सेवा देने के बाद राजनीति में आए। भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर में उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए। उत्कृष्ट सैन्य सेवा के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से भी सम्मानित किया गया था।

सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और जल्द ही उत्तराखंड की राजनीति में एक मजबूत और साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में पहचान बनाई। वह कई बार गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद चुने गए और केंद्र में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री भी रहे। उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं और आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिली।

दो बार संभाली उत्तराखंड की कमान:
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में बी.सी. खंडूरी ने दो कार्यकालों में प्रदेश का नेतृत्व किया। उन्हें एक सख्त प्रशासक, ईमानदार नेता और अनुशासनप्रिय मुख्यमंत्री के तौर पर याद किया जाता है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उनकी कार्यशैली अक्सर चर्चा में रहती थी।

राजनीतिक विरोधी भी उनकी सादगी, स्पष्टवादिता और व्यक्तिगत ईमानदारी का सम्मान करते थे। उत्तराखंड में सड़क, प्रशासनिक सुधार और सुशासन की दिशा में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

मुख्यमंत्री धामी ने जताया शोक:
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मेजर जनरल बी.सी. खंडूरी ने सेना से लेकर सार्वजनिक जीवन तक राष्ट्रसेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका निधन केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति है।

उत्तराखंड की राजनीति में एक खालीपन:
बी.सी. खंडूरी उन नेताओं में गिने जाते थे जिनकी पहचान सत्ता से अधिक उनकी सादगी और साफ छवि से होती थी। उत्तराखंड की राजनीति में उनका नाम एक ऐसे जननेता के रूप में हमेशा याद किया जाएगा, जिन्होंने राजनीति को सेवा और अनुशासन के साथ जोड़ा।

उनके निधन की खबर सामने आने के बाद प्रदेशभर में शोक की लहर है। राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य क्षेत्र से जुड़े अनेक लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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