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धर्मयुद्ध का 73वां दिन

News24.com की सबसे तेज खबर। Buro chief।।।।।। गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग: मनमोहन शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि गैरसैण समिति के संयोजक श्री विनोद प्रसाद रतूड़ी जी के नेतृत्व में आज आंदोलन के 73वें दिन भी डटे रहे भगवती प्रसाद रतूड़ी, सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
विशेष कवरेज (News24.com)
स्थान: एकता भवन, नई टिहरी (उत्तराखंड)
नई टिहरी: उत्तराखंड की जनभावनाओं के प्रमुख केंद्र गैरसैंण को सूबे की स्थाई राजधानी घोषित करवाने की मांग को लेकर चल रहा जन-आंदोलन अब और अधिक उग्र होता जा रहा है। इसी कड़ी में आज आंदोलन के 73वें दिन वरिष्ठ आंदोलनकारी भगवती प्रसाद रतूड़ी जी एकता विहार में कार्मिक अनशन पर बैठे।
लगातार 73 दिनों से चल रहे इस शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ आंदोलन ने अब सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अनशन स्थल पर मौजूद आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में सरकार को चेतावनी दी है कि यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
"43 शहीदों का है ये सम्मान, गैरसैंण है उत्तराखंड की असली पहचान!"
आंदोलनकारियों ने पुरखों की शहादत और पहाड़ के साथ हो रहे अन्याय को याद करते हुए कहा कि राज्य गठन के मूल संकल्प को मौजूदा सरकारों ने पूरी तरह भुला दिया है। उन्होंने कहा कि 43 शहीदों का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा और जब तक गैरसैंण को पूर्ण रूप से स्थाई राजधानी घोषित नहीं किया जाता, तब तक पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।
अब 'आर-पार' की तैयारी: जल्द शुरू होगा आमरण अनशन
भगवती प्रसाद रतूड़ी जी ने अनशन स्थल से हुंकार भरते हुए कहा, "यह कार्मिक अनशन केवल शुरुआत है। अगर सरकार ने जल्द ही हमारी जायज मांगों पर संज्ञान नहीं लिया, तो हम 'आमरण अनशन' की ओर बढ़ेंगे। सरकार पूरी तरह तैयार रहे, क्योंकि अब यह लड़ाई आर-पार की होगी।"
मोर्चे पर डटे अन्य सहयोगियों (उत्पलांश सिंह, लक्ष्मी प्रसाद रतूड़ी, बलवीर सिंह आदि) ने भी जनता से इस मुहिम से जुड़ने की अपील की है। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि अब कागजी आश्वासनों का वक्त खत्म हो चुका है और उन्हें सिर्फ स्थाई राजधानी की आधिकारिक घोषणा चाहिए।
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