भारत में इस बात की चिंता है कि भारत के लिए लाखों शहीदों की कुर्बानी के बाद भी हम गुलामी की ओर बढ़ रहे हैं।
शहीद भगत सिंह प्रेस एसोसिएशन पंजाब के सलाहकार हरबंस सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए अपना दुख साझा किया। उन्होंने कहा कि आज भी कई समस्याएं हैं, राजनीति में अंदरूनी लड़ाई, भ्रष्टाचार, अपराध और आर्थिक चुनौतियां हैं। यह भावना कई लोगों में मौजूद है। लेकिन मैं तथ्यों पर आधारित विस्तृत नजरिया और व्यावहारिक सुझाव देता हूं। तथ्यों की तस्वीर (2025-26 तक) भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। GDP ग्रोथ लगभग 6.5-7.6% रही है, घरेलू मांग मजबूत है, महंगाई कम है (लगभग 2-4%)। बेरोजगारी एक चुनौती बनी हुई है, खासकर युवाओं में। लेकिन यह गुलामी की स्थिति नहीं है। भारत दुनिया की 5वीं-6ठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भ्रष्टाचार: ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के 2025 CPI में स्कोर 39/100, रैंक 91/182। यह बेहतर नहीं है, लेकिन कई देशों से बेहतर है। रिश्वत अभी भी एक बड़ी समस्या है, खासकर निचले लेवल पर। क्राइम और मर्डर: मर्डर रेट लगभग 2 प्रति लाख आबादी है (दुनिया के एवरेज से कम)। ओवरऑल क्राइम रेट ज़्यादा लगता है क्योंकि रिपोर्टिंग बढ़ी है, लेकिन कई जगहों पर चार्जशीट रेट भी बढ़ा है। डेमोक्रेसी: चुनाव होते हैं, वोटर टर्नआउट ज़्यादा होता है। लेकिन पोलराइजेशन, मीडिया बायस और इंस्टीट्यूशन पर दबाव की शिकायतें आती हैं। यह सब ठीक नहीं है, लेकिन एक तरफ प्रोग्रेस हो रही है। फ्रस्ट्रेटिंग यह है कि नेता आपस में बदनामी में लगे रहते हैं और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं (एजुकेशन, हेल्थ, एम्प्लॉयमेंट, ज्यूडिशियरी रिफॉर्म) पर कम ध्यान देते हैं। सरकार बड़े बदलाव लाती है, लेकिन उसका बेस लोग होते हैं। यह काम लंबा है लेकिन असरदार है: 1. सोच-समझकर वोट दें: अनाउंसमेंट को न देखें, परफॉर्मेंस देखें (पिछले चुनावों में, एम्प्लॉयमेंट, एजुकेशन, लॉ एंड ऑर्डर, करप्शन पर काम)। लोकल चुनावों (पंचायत, म्युनिसिपल) पर ज़्यादा ध्यान दें क्योंकि यहीं पर रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर पड़ता है। वोटर लिस्ट को साफ रखने और फ्रॉड रोकने में हिस्सा लें। 2. करप्शन के खिलाफ: RTI (सूचना का अधिकार) फाइल करें। लोकल स्कीमों का हिसाब मांगें। अगर रिश्वत मांगी जाए, तो ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म (जैसे DBT, आधार-लिंक्ड सर्विसेज़) का इस्तेमाल करें और शिकायत करें (CVC, लोकपाल, यूपी राजपाल पोर्टल)। टैक्स भरें और बिल जमा करें, ब्लैक मनी कम करें।
3. अपने आस-पास बदलाव लाएं: एजुकेशन और स्किल्स पर ध्यान दें: अपने बच्चों को अच्छी एजुकेशन दें, युवाओं को वोकेशनल ट्रेनिंग के लिए बढ़ावा दें। कम्युनिटी में हिस्सा लें, लोकल प्रॉब्लम्स (सड़कें, पानी, सफ़ाई) पर ग्रुप बनाएं और उन्हें म्युनिसिपैलिटी के साथ मिलकर सॉल्व करें। फेक न्यूज़ और पोलराइजेशन से बचें। अलग-अलग सोर्स से फैक्ट्स चेक करें।
4. बड़े बदलावों के लिए: इंस्टीट्यूशनल रिफॉर्म: ज्यूडिशियरी, पुलिस और इलेक्शन कमीशन में रिफॉर्म्स के लिए अपनी आवाज़ उठाएं (पिटीशन, कैंपेन)। इकोनॉमिक: रोज़गार देने वाली पॉलिसीज़ (मैन्युफैक्चरिंग, एग्रीकल्चर रिफॉर्म, ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस) को सपोर्ट करें। पुलिस रिफॉर्म: पुलिस को डीपॉलिटिकलाइज़ करने और मॉडर्नाइज़ करने के लिए आवाज़ उठाएं।
5. लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजी: सिविल सोसाइटी, NGOs या लोकल ग्रुप्स से जुड़ें जो ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी पर काम करते हैं। अपने बच्चों में ईमानदारी और राष्ट्रवाद की भावना डालें, यही लंबे समय का हल है। जो लोग सीधे राजनीति में हिस्सा लेते हैं, उन्हें हिम्मत दें कि वे बिना सेवा किए सत्ता में न आएं। आखिर में: भारत को बदलने के लिए लगातार कोशिशों की ज़रूरत है, निराशा की नहीं। नेताओं को आपस में लड़ना बंद करके देश के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, इसके लिए लोगों को उन्हें ज़िम्मेदार ठहराना होगा। आप अपने इलाके से एक ईमानदार वोटर, एक जागरूक नागरिक और एक अच्छा इंसान बनकर शुरुआत करें। उम्मीद रखें, लेकिन काम भी करें।
हरबंस सिंह, सलाहकार
शहीद भगत सिंह एसोसिएशन पंजाब +918054400953