बीमारी से कम, अस्पताल के भारी बिल से ज़्यादा टूट रहा गरीब
जमशेदपुर समेत झारखंड के अस्पतालों की बढ़ती लागत पर उठे सवाल
झारखंड के जमशेदपुर सहित राज्य के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ आम आदमी महंगाई से परेशान है, वहीं दूसरी ओर बीमारी आने पर अस्पतालों के भारी-भरकम बिल गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की कमर तोड़ दे रहे हैं।
कहा जाता है कि बीमारी इंसान को शारीरिक रूप से कमजोर करती है, लेकिन अस्पताल का बिल पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ देता है। आज कई परिवार इलाज कराने के लिए कर्ज लेने, जमीन बेचने या गहने गिरवी रखने तक को मजबूर हो रहे हैं।
जमशेदपुर के कई बड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा बेहतर जरूर है, लेकिन वहां का खर्च गरीबों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। वहीं सरकारी अस्पतालों में भीड़, डॉक्टरों की कमी और संसाधनों की दिक्कत के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में गरीब आदमी आखिर जाए तो जाए कहां?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को समय पर सस्ता और बेहतर इलाज मिल सके। आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं कई लोगों के लिए राहत बनी हैं, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में मरीज ऐसे हैं जिन्हें पूरी मदद नहीं मिल पाती।
समाजसेवियों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवा व्यापार नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम होना चाहिए। अगर अस्पतालों में पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाएं बढ़ें, तो मरीजों और उनके परिवारों को राहत मिल सकती है।
आज जरूरत इस बात की है कि सरकार, अस्पताल प्रबंधन और समाज मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करें जहां किसी गरीब की जान सिर्फ पैसों की कमी की वजह से खतरे में न पड़े।
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