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कोलकाता की जीवंत विरासत को सहेजने के लिए हेरिटेज कॉन्फ्रेंस का आयोजन;

19 मई 2026
अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस (International Museum Day) के विशेष अवसर पर कल, 18 मई को कोलकाता में "कोलकाता'स लिविंग लेगेसी: फिटिंग द पास्ट इन टू द फ्यूचर" (Kolkata's Living Legacy: Fitting the past into the future) विषय पर एक भव्य हेरिटेज कॉन्फ्रेंस और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम द बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (BCC&I) और इनटैक (INTACH) के संयुक्त तत्वावधान में BCC&I के 'विलियमसन मैगोर हॉल' में संपन्न हुआ।
इतिहास और आधुनिकता के समन्वय पर चर्चा
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कोलकाता की ऐतिहासिक धरोहरों और समृद्ध सांस्कृतिक अतीत को आधुनिक भविष्य के साथ जोड़ते हुए उन्हें संरक्षित करना था। कार्यक्रम में शहर की वास्तुकला, पुराने अभिलेखागारों (Archives) के रखरखाव और सांस्कृतिक विरासत के सतत विकास (Sustainable Development) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के आर्काइव्स और बोटेनिकल गार्डन के जीर्णोद्धार जैसी बड़ी परियोजनाओं पर भी प्रस्तुतियां दी गईं।
कई क्षेत्रों के दिग्गज रहे मौजूद
कार्यक्रम में कला, सिनेमा, कॉर्पोरेट जगत और विरासत संरक्षण (Heritage Conservation) से जुड़ी कई जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की और अपने विचार साझा किए। मुख्य वक्ताओं और पैनलिस्टों में शामिल थे:
श्री गौतम घोष: प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और कोलकाता के वर्तमान शेरिफ।
श्री जी. एम. कपूर: प्रख्यात विरासत संरक्षणवादी और इनटैक (INTACH) के स्टेट कन्वेनर।
डॉ. रमकंत हूम: चीफ आर्काइविस्ट, स्टेट बैंक आर्काइव्स एंड म्यूजियम, कोलकाता।
सुश्री अनन्या भट्टाचार्य: निदेशक और सह-संस्थापक, banglanatak dot com।
डॉ. कलोल बसु: चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर (कम्युनिकेशंस एंड मीडिया), टीसीएस (TCS)।
श्री प्रशांत शर्मा: प्रबंध निदेशक, चरनॉक हॉस्पिटल्स।
पार्टनर्स का सहयोग
इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और कैरिंग माइंड्स इंटरनेशनल ने 'गोल्ड पार्टनर्स' के रूप में अपनी भूमिका निभाई। इसके अलावा ईस्ट इंडिया फार्मास्युटिकल वर्क्स लिमिटेड, आरटी नेटवर्क सॉल्यूशंस, एकदुनिया डॉट कॉम, मित्रा कैफे और सुलेखा जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं ने भी इस कार्यक्रम को अपना सहयोग प्रदान किया।
सम्मेलन के अंत में कोलकाता की विरासत को सहेजने में अनुकरणीय योगदान देने वाले दिग्गजों को सम्मानित किया गया। उपस्थित विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भावी पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़े रखने के लिए ऐसे आयोजनों और सामूहिक प्रयासों की अत्यंत आवश्यकता है।

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