ख्वाजा अब्दुल अजीज बसतामी, हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी के उन खास खलीफाओं में शुमार हैंboltidelhi
ख्वाजा अब्दुल अजीज बसतामी, हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी के उन खास खलीफाओं में शुमार हैं जिनका उनके साथ एक गहरा रूहानी ताल्लुक था। तारीख बताती है कि हजरत कुतुब साहब ने अपनी इबादत की जगह यानी हुजरा और अपने मजार-ए-अकदस (पवित्र कब्र) के लिए जमीन ख्वाजा बसतामी साहब से ही खरीदी थी
आज भी महरौली में दरगाह शरीफ के अंदरूनी अहाते के कोने में हजरत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी के रौजे के अलावा सिर्फ ख्वाजा बसतामी की ही मजार ऐसी है जो एक मखसूस (विशेष) ढकी हुई इमारत के नीचे मौजूद है
यह मजार संगमरमर के खूबसूरत खंभों पर बनी हुई है, जो उन दोनों बुजुर्गों के बीच की मोहब्बत और ख्वाजा बसतामी के ऊंचे मर्तबे को साफ तौर पर बयां करती है