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कालका-पिंजौर के 113 गांवों से धारा 7ए और पेरीफेरी एक्ट हटाने की मांग तेज

पंचकूला। शिवालिक विकास मंच के प्रदेशाध्यक्ष एवं हरियाणा कांग्रेस के पूर्व सचिव विजय बंसल एडवोकेट ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को ज्ञापन भेजकर जिला पंचकूला के 113 गांवों में लागू हरियाणा क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम 1975 की धारा 7ए और पेरीफेरी एक्ट 1952 को हटाने की मांग की है।

विजय बंसल ने कहा कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री को कई बार ज्ञापन भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि धारा 7ए लागू होने के कारण ग्रामीणों, जमींदारों और शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को अपनी जमीन बेचने और खरीदने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नगर परिषद कालका-पिंजौर क्षेत्र में शामिल गांवों में मकानों के नक्शे भी पास नहीं किए जा रहे, जिससे विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब ग्रामीण क्षेत्रों को पहले ही शहरी क्षेत्र घोषित किया जा चुका है तो वहां धारा 7ए लागू रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। कालका-पिंजौर का क्षेत्र अर्ध-पहाड़ी होने के कारण अधिकांश लोगों के पास एक एकड़ से भी कम जमीन है, जिससे लोगों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है।

विजय बंसल ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने कालका क्षेत्र को औद्योगिक रूप से पिछड़ा क्षेत्र घोषित कर रखा है, लेकिन पेरीफेरी एक्ट और धारा 7ए लागू होने के कारण यहां उद्योग लगाने की अनुमति तक नहीं मिलती। सरकारी अनदेखी के चलते कालका और पिंजौर क्षेत्र विकास की दौड़ में लगातार पिछड़ते जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 25 नवंबर 2020 को नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर पंचकूला जिले के 212 गांवों में धारा 7ए लागू की गई थी। बाद में 3 मार्च 2021 को करीब 100 गांवों को इस सूची से बाहर कर दिया गया, लेकिन आज भी 113 गांवों में यह धारा लागू है।

विजय बंसल ने कहा कि पंजाब के जीरकपुर, मोहाली और डेराबस्सी जैसे क्षेत्र तेजी से विकसित हो चुके हैं, जबकि कालका-पिंजौर क्षेत्र विकास के मामले में पिछड़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने विकास को बढ़ावा देने के लिए पेरीफेरी एक्ट हटाकर शहरी विकास को बढ़ावा दिया, जबकि हरियाणा सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में हरियाणा सरकार ने कालका, पिंजौर और आसपास की पंचायतों को मिलाकर नगर निगम घोषित किया था, लेकिन बाद में पेरीफेरी एक्ट में संशोधन कर 154 गांवों में इसे लागू कर दिया गया। शिवालिक विकास मंच ने वर्ष 2012 में इस मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में उठाया, जिसके बाद 102 गांवों से पेरीफेरी हटाई गई, लेकिन 52 गांवों में यह अब भी लागू है।

विजय बंसल ने दावा किया कि पेरीफेरी एक्ट और धारा 7ए लागू होने के बावजूद क्षेत्र में 70 से अधिक अवैध कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। इससे सरकार को नक्शे पास करने और भूमि रजिस्ट्री से मिलने वाले राजस्व में भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि क्षेत्र के विकास और लोगों की परेशानियों को देखते हुए जल्द से जल्द धारा 7ए और पेरीफेरी एक्ट हटाया जाए।

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