मानव सेवा की मिसाल बने डॉ. वीरेश कुमार सिंह, 26 वर्षों की निःस्वार्थ जनसेवा पर मिला विशेष सम्मान
जनसेवा का पर्याय बने डॉ. वीरेश कुमार सिंह, 26 वर्षों की निस्वार्थ सेवा पर मिला विशिष्ट सम्मान
बदायूं | डॉ. वीरेश कुमार सिंह ने मानव सेवा, चिकित्सा और सामाजिक सहयोग के क्षेत्र में 26 वर्षों से लगातार कार्य कर समाज में एक अनूठी पहचान बनाई है। उनके निस्वार्थ सेवा कार्यों को देखते हुए सामाजिक शोधकर्ताओं एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा गहन अध्ययन किया गया, जिसके बाद उन्हें जन-सेवा के क्षेत्र में विशिष्ट सम्मान प्रदान किया गया। उनके जीवन संघर्ष, सेवाभाव और सामाजिक योगदान पर एक विशेष पुस्तक भी तैयार की जा रही है। आज के दौर में जहां अधिकतर लोग उच्च शिक्षा प्राप्त कर निजी सुख-सुविधाओं और करियर को प्राथमिकता देते हैं, वहीं डॉ. वीरेश कुमार सिंह ने अपने ज्ञान और अनुभव को समाज के कमजोर, असहाय और जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने पिछले 26 वर्षों से अपने निजी क्लीनिक पर आने वाले मरीजों से कभी परामर्श शुल्क नहीं लिया। उनकी यह सेवा हजारों गरीब परिवारों के लिए वरदान बनी हुई है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उन्होंने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में 1200 से अधिक निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किए हैं। इन शिविरों में गरीब मरीजों को न केवल निःशुल्क उपचार मिला, बल्कि दवाइयां भी वितरित की गईं। इससे अनेक लोगों को समय पर इलाज मिल सका और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित परिवारों को राहत मिली। डॉ. वीरेश कुमार सिंह की सेवा का एक अत्यंत संवेदनशील पहलू बेटियों के विवाह में सहयोग है। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, किसी भी गरीब या जरूरतमंद परिवार की बेटी के विवाह की सूचना मिलते ही वे बिना निमंत्रण के वहां पहुंचते हैं और आर्थिक सहायता प्रदान कर परिवार का सहयोग करते हैं। अब तक लगभग 1500 से अधिक बेटियों के विवाह में सहयोग देकर उन्होंने समाज में एक अभिभावक की भूमिका निभाई है। शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में यह भी सामने आया कि डॉ. वीरेश कुमार सिंह केवल चिकित्सा सेवा तक सीमित नहीं हैं। वे ग्रामीणों और शहरी लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हैं तथा प्रशासनिक स्तर तक पहुंचाकर समाधान कराने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि देहात से शहर तक लोग उन्हें भरोसेमंद समाजसेवी और जनहितैषी व्यक्तित्व के रूप में देखते हैं। सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। बुजुर्गों, माताओं, बहनों और युवाओं ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी निजी खुशियों से ऊपर उठकर समाज की सेवा को अपना धर्म बनाया है। लोगों ने उन्हें समाज के लिए प्रेरणा और जरूरतमंदों का सहारा बताया। डॉ. वीरेश कुमार सिंह की यह उपलब्धि केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि उनके 26 वर्षों के तप, त्याग और समर्पण की पहचान है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची सफलता वही है, जो दूसरों के जीवन में खुशियां और सहारा बन सके। संवाद