_समाधान दिवस में 2 बजे ही उठकर निकल गए एसडीएम, सुनवाई अधूरी शिकायतें जस की तस_
_समाधान दिवस में 2 बजे ही उठकर निकल गए एसडीएम, सुनवाई अधूरी शिकायतें जस की तस_
_जनता का सवाल समाधान दिवस क्यों बना खानापूर्ति_
प्रयागराज।बारा तहसील में शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। उप जिलाधिकारी डॉ. गणेश कनौजिया की मौजूदगी में शिकायतों की सुनवाई शुरू हुई और फरियादी सुबह से ही तहसील परिसर में अपनी अर्जी लेकर लाइन में खड़े रहे। जमीन, पानी और आवास जैसी मूलभूत समस्याएं लेकर लोग उम्मीद के साथ पहुंचे थे। कागजों पर निस्तारण दिखाने वाली शिकायतों की हकीकत जमीन पर देखने पर पता चलता है कि किसी भी शिकायतकर्ता को निस्तारण या न्याय नहीं मिला। लेकिन एसडीएम डॉ. गणेश कनौजिया ने घड़ी में ठीक 2 बजते ही कुर्सी छोड़ दी और उनके साथ ही तहसीलदार व बाकी अधिकारी भी अपने कक्ष में लौट गए। किसी भी शिकायत का संपूर्ण निस्तारण किए बिना ही मंच खाली हो गया। क्षेत्र में सरकारी जमीनें भी धीरे-धीरे कब्जे में आ रही हैं, लेकिन एसडीएम साहब उन्हें रोकने में पूरी तरह असफल साबित हो रहे हैं। जनता का सवाल सीधा है, अगर फरियादी समय से आ सकते हैं तो अफसर क्यों नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एसडीएम का ध्यान सुनवाई से ज्यादा फोटो खिंचवाने पर है और अवैध खनन कार्रवाई के नाम पर मीडिया कवरेज ही उनकी प्राथमिकता बन गई है। नीचे लेवल के अधिकारी भी एसडीएम के व्यवहार से लगातार नाखुश दिख रहे हैं। जमीन विवाद, पानी की किल्लत और आवास की अर्जियां अब भी जस की तस पड़ी हैं। कुछ शिकायतकर्ता तो पहली बार समाधान दिवस में आए थे, मगर निराश लौटे। लोगों का आरोप है कि एसडीएम डॉ. गणेश कनौजिया सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं और समाधान दिवस का उद्देश्य ही फेल हो गया जब अधिकारी समय से पहले निकल जाएं। क्षेत्र में तहसील प्रशासन के रवैये से नाराजगी बढ़ रही है और लोग अब उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। अब जनता मांग कर रही है कि एसडीएम जवाब दें, सुनवाई पूरी हो, रस्म अदायगी नहीं।
_पत्रकार शिवम शुक्ला_
_शंकरगढ़ प्रयागराज_