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दिल्ली मेट्रो में सीट वही, फैसला बदल गया: अंकल-युवती का वाकया बना यात्रियों की मुस्कान की वजह

दिल्ली मेट्रो में सीट वही, फैसला बदल गया: अंकल-युवती का वाकया बना यात्रियों की मुस्कान की वजह

नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो की एक बोगी में हुआ छोटा-सा वाकया शनिवार को यात्रियों के बीच चर्चा का विषय बन गया। रोज की भागदौड़ और भीड़ के बीच हुई इस हल्की-फुल्की घटना ने सफर को कुछ पलों के लिए यादगार बना दिया।

क्या हुआ मेट्रो में
भीड़भाड़ वाले कोच में एक युवती वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित सीट के पास खड़े एक अंकल से बार-बार विनम्रता से पूछ रही थी, अंकल जी, बैठ जाऊँ क्या? हर बार अंकल बोर्ड की तरफ इशारा कर कहते, ये वरिष्ठ नागरिकों की सीट है यहाँ सिर्फ बुजुर्ग बैठ सकते हैं।

कुछ मिनट बाद युवती ने मुस्कुराते हुए हल्के अंदाज में फिर पूछा, अब तो बैठ जाऊँ? इतना सुनते ही अंकल का जवाब बदल गया। उन्होंने कहा, अरे हाँ, बैठ जाओ कोई बात नहीं, आराम से बैठो।

खिलखिला उठे सहयात्री
अंकल का बदला हुआ जवाब सुनते ही बोगी में खड़े यात्रियों के चेहरे पर मुस्कान तैर गई। किसी ने धीरे से कहा, सीट वही, नियम वही पर फैसला बदल गया! पल भर में माहौल हल्का-फुल्का हो गया और रोजमर्रा की थकान के बीच यात्रियों को एक मजेदार किस्सा मिल गया।

क्या कहते हैं मेट्रो के नियम
DMRC के नियमों के मुताबिक, मेट्रो कोच में प्राथमिकता सीटें वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद यात्रियों के लिए आरक्षित होती हैं। अन्य यात्रियों से अपेक्षा की जाती है कि सीट खाली होने पर भी जरूरतमंद को प्राथमिकता दें और शिष्टाचार बनाए रखें।

सीख भी, मुस्कान भी
इस छोटी सी घटना ने याद दिलाया कि सार्वजनिक परिवहन में संवेदनशीलता और समान व्यवहार जरूरी है। नियम अपनी जगह हैं, लेकिन एक मुस्कान और थोड़ी नरमी भीड़ भरी यात्रा को आसान बना देती है। सोशल मीडिया पर भी यह वाकया #MetroStory के साथ शेयर हो रहा है।

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