जनगणना का महा-बहिष्कार! 'ओबीसी कॉलम नहीं, तो गिनती नहीं'... खापा गांव से बैरंग लौटे कर्मचारी, भड़का आक्रोश!
भंडारा/तुमसर: देश और राज्य में एक तरफ जहां डिजिटल और आधुनिक तकनीक से जनगणना कराने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर एक बहुत बड़े समाज का गुस्सा फूट पड़ा है। तुमसर तालुका के खापा गांव में २०२६-२७ की गृह-जनगणना के पहले ही दिन स्थानीय नागरिकों के तीव्र आक्रोश के चलते प्रशासनिक अमले को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। जनगणना के फॉर्म में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए स्वतंत्र कॉलम न होने से नाराज ग्रामीणों ने जनगणना का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया और गांव पहुंचे कर्मचारियों को दो टूक जवाब देकर आल्यापावली (बैंरंग) वापस लौटा दिया।
"पहले ओबीसी का कॉलम लाओ, फिर जनगणना का बस्ता खोलो!"
खापा गांव के नागरिकों ने बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक जनगणना के प्रपत्र (फॉर्म) में ओबीसी समाज के लिए अलग से रकाना (कॉलम) शामिल नहीं किया जाता, तब तक गांव में किसी भी तरह की जनगणना नहीं होने दी जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि:
देश और राज्य में ओबीसी समाज की आबादी बहुत बड़ी है, फिर भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति-जनजाति (SC/ST) की अलग से गिनती की जा रही है, लेकिन ओबीसी को सिर्फ 'अन्य' (Others) की श्रेणी में धकेल दिया गया है, जो इस समाज के साथ बड़ा अन्याय है।
जब तक जातिगत जनगणना नहीं होती और ओबीसी का स्वतंत्र कॉलम नहीं आता, तब तक समाज की सही स्थिति और संख्या का वास्तविक मूल्यांकन हो ही नहीं सकता।
पूरे गांव ने एक सुर में लिया फैसला, डरा प्रशासन
जैसे ही जनगणना कर्मचारी खापा गांव पहुंचे, ग्राम पंचायत के सभी मौजूदा और पूर्व पदाधिकारी, ग्राम पंचायत कर्मचारी, सामाजिक कार्यकर्ता और भारी संख्या में ग्रामीण एकजुट हो गए। सभी ने एकमत होकर कर्मचारियों को गांव में किसी भी तरह का पंजीकरण करने से रोक दिया।
पहले ही दिन हुए इस जबर्दस्त विरोध ने प्रशासनिक मशीनरी के हाथ-पांव फुला दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को शांत करने और मध्यस्थता करने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे।
पूरे राज्य में आंदोलन फैलने की चेतावनी
ओबीसी सेल के जिला अध्यक्ष राजकुमार माटे ने सरकार को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा:
"सरकार लगातार ओबीसी समाज की इस न्यायसंगत मांग की अनदेखी कर रही है। यही वजह है कि अब ग्रामीण इलाकों से यह गुस्सा जन-आंदोलन के रूप में फूट रहा है। खापा गांव से शुरू हुआ यह विरोध अब सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल्द ही पूरे जिले और राज्य में फैलेगा।"
सुलग रहा है विवाद: खापा गांव के इस कड़े स्टैंड के बाद अब तुमसर तालुका के अन्य गांवों में भी विरोध की चिंगारी सुलगने लगी है। अपनी स्वतंत्र पहचान की लड़ाई लड़ रहे ओबीसी समाज के इस कड़े रुख के कारण अब यह विवाद और ज्यादा तूल पकड़ने की आशंका है।