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एचपीएससी भर्ती पर हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत, 35% पात्रता शर्त हटाने की मांग: डॉ. किरण पुनिया

जननायक जनता पार्टी, हरियाणा की महिला प्रभारी डॉ. किरण पुनिया ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा एचपीएससी की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया एवं संबंधित विज्ञापन को रद्द किए जाने के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला प्रदेश में भर्ती प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
डॉ. पुनिया ने कहा कि लंबे समय से हरियाणा के युवा भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं, इंटरव्यू प्रणाली की अस्पष्टता तथा बड़ी संख्या में पद खाली छोड़े जाने को लेकर सवाल उठा रहे थे। अदालत के इस निर्णय ने इन चिंताओं को गंभीरता से स्वीकार किया है, जो युवाओं के संघर्ष की भी एक तरह से जीत है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब एचपीएससी द्वारा लागू 35 प्रतिशत पात्रता शर्त को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। इस शर्त के कारण हजारों योग्य अभ्यर्थी, जिनके पास नेट, जेआरएफ, पीएचडी और लंबा शिक्षण अनुभव है, इंटरव्यू तक पहुंचने से वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि 2400 से अधिक पदों के बावजूद बड़ी संख्या में पद रिक्त रह गए, जो चयन प्रक्रिया की गंभीर खामियों को दर्शाता है। कई विषयों में पर्याप्त योग्य उम्मीदवार होने के बाद भी सीटें खाली रहना चिंता का विषय है।
डॉ. पुनिया ने कहा कि यह समस्या केवल एक भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य भर्तियों में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली है। उन्होंने मांग की कि इंटरव्यू के लिए पदों के मुकाबले कम से कम दो से तीन गुना अभ्यर्थियों को बुलाया जाए तथा पूरी भर्ती प्रक्रिया को यूजीसी मानकों के अनुरूप दोबारा लागू किया जाए।
उन्होंने सरकार और एचपीएससी से अपील की कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और खाली पदों को शीघ्र भरकर युवाओं को न्याय दिया जाए।

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