भारत के किसानों की आर्थिक स्थिति और समस्याएं
भारत: आज के आधुनिक किसान की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। किसान खुद से सवाल करता है कि वह 1 किलो बीज से 100 किलो फसल उगाता है, फिर भी वह कर्जदार क्यों रहता है। किसान कड़कड़ाती ठंड और तेज गर्मी में खेतों में मेहनत करता है, बारिश के मौसम में भी काम जारी रखता है। वह भ्रष्टाचार से मुक्त रहते हुए भी खाद, बीज, दवाई, डीजल, बिजली बिल और बीमा कंपनियों से जुड़े भ्रष्टाचार का शिकार होता है।
किसान की अंतरात्मा यह बताती है कि वह अपनी फसल का मूल्य तय नहीं कर पाता, क्योंकि बीज, खाद और डीजल के दाम दुकानदार तय करते हैं और फसल का भाव भी खरीदार तय करता है। इससे किसान उत्पादन के बाद भी कर्ज में डूबता रहता है। वहीं, जो फसल से बनी वस्तुएं बेचते हैं, वे अपना मूल्य तय कर अरबपति बन जाते हैं। किसान की यह आर्थिक व्यथा उसकी मेहनत के बावजूद सही मूल्य न मिलने और विपणन प्रणाली में असमानता के कारण बनी हुई है।