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सच का आईना: दुर्भावनापूर्ण आरोपों और 'फेक नैरेटिव' पर हमारा खुला जवाब

सच का आईना: दुर्भावनापूर्ण आरोपों और 'फेक नैरेटिव' पर हमारा खुला जवाब
"पत्रकारिता का धर्म सच दिखाना है, किसी की स्क्रिप्ट पर ताली बजाना नहीं।"
पिछले दिनों बहलोलपुर गाँव की कवरेज को लेकर एकतरफा और भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मेरी (या हमारे संस्थान की) छवि को धूमिल करने का एक घटिया प्रयास किया गया। उस पोस्ट में बिना किसी प्रमाण के मुझे "तथाकथित पत्रकार", "दलाल" और "प्रधान का पाला हुआ" जैसे शब्दों से नवाजा गया।
यह लेख किसी के व्यक्तिगत अहंकार को संतुष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि उस जनता के सामने सच लाने के लिए है, जिसके भरोसे पर हमारी पत्रकारिता टिकी है। आइए, उस भ्रामक नैरेटिव की परतों को खोलते हैं:
1. क्या स्वतंत्र पत्रकारिता करना अपराध है?
जब कोई बाहरी टीम गाँव में आकर केवल एकतरफा कहानी या सनसनीखेज हेडलाइन बनाने की कोशिश करती है, तो स्थानीय पत्रकार होने के नाते हमारा यह कर्तव्य है कि हम संतुलित पत्रकारिता (Balanced Journalism) का पालन करें।
मैंने सिर्फ यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि कहानी का दूसरा पहलू भी सामने आए।
किसी को निष्पक्षता की सलाह देना या दोनों पक्षों को सुनने की बात कहना यदि "सेटिंग" या "धमकी" कहलाता है, तो यह पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों की समझ की कमी को दर्शाता है।
2. "तथाकथित" कौन? प्रमाण लाएं या माफी मांगें
मुझ पर "फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी" देने का मनगढ़ंत आरोप लगाया गया है।
हमारा खुला चैलेंज: यदि आपके पास ऐसी किसी धमकी, दलाली या पैसे के लेन-देन का कोई भी ऑडियो, वीडियो या पुख्ता सबूत है, तो उसे तुरंत सार्वजनिक करें। बिना सबूत के किसी पेशेवर पत्रकार पर लांछन लगाना न सिर्फ एक कानूनी अपराध (मानहानि) है, बल्कि आपकी अपनी पत्रकारिता की हताशा को भी दिखाता है।
3. विकास के सच से हमें कोई गुरेज नहीं
गाँव बहलोलपुर में विकास हुआ है या नहीं, गरीब परिवारों को हक मिला है या नहींइसकी जांच जिला प्रशासन (DM और SP) को करने का पूरा अधिकार है और हम खुद इसका स्वागत करते हैं। लेकिन विकास की कमियों को उजागर करने के बहाने स्थानीय पत्रकारों को निशाना बनाना और उन्हें बदनाम करके 'टीआरपी' या 'लाइक्स' बटोरने का स्टंट बेहद निंदनीय है।
हमारा अगला कदम: कानूनी कार्रवाई
सोशल मीडिया पर फैलाए गए इस भ्रामक पोस्ट, गाली-गलौज वाले नैरेटिव और चरित्र-हनन (Character Assassination) के खिलाफ हम चुप बैठने वाले नहीं हैं।
मानहानि का नोटिस: हमारी छवि को ठेस पहुँचाने के लिए संबंधित टीम/पेज एडमिन के खिलाफ कानूनी मानहानि का नोटिस भेजा जा रहा है।
प्रशासन को शिकायत: जिला पुलिस अधीक्षक (SP) और साइबर सेल को इस बात की लिखित शिकायत दी जा रही है कि कैसे सोशल मीडिया का दुरुपयोग करके एक स्थानीय पत्रकार को मानसिक रूप से प्रताड़ित और बदनाम किया जा रहा है।
जनता जनार्दन से अपील
हम बहलोलपुर और क्षेत्र की जनता से अपील करते हैं कि वे इस तरह के भ्रामक और 'फेक नैरेटिव' वाले प्रोपेगैंडा से दूर रहें। हमारी कलम न कल बिकी थी, न आज झुकी है। हम निष्पक्ष थे, निष्पक्ष हैं और हमेशा जनता की सही और पूरी आवाज़ उठाते रहेंगे।

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