गाँव का सुकून छिन रहा, बढ़ती राजनीति से लोग परेशान प्रेम बढ़ाइए, विवाद नहीं की अपील।
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गाँव, जो कभी शांति, सुकून और आपसी भाईचारे की पहचान हुआ करता था, आज धीरे-धीरे राजनीतिक खींचतान का केंद्र बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ नए नेता अपने निजी स्वार्थ के लिए गाँव के माहौल को बिगाड़ रहे हैं और आपसी मतभेद को बढ़ावा दे रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, पहले जहाँ गाँव में प्रेम, सहयोग और एकजुटता देखने को मिलती थी, वहीं अब छोटी-छोटी बातों पर राजनीति हावी हो रही है। इससे गाँव का सौहार्द प्रभावित हो रहा है और लोगों के बीच दूरी बढ़ रही है।
महाभारत के कुरुक्षेत्र की तरह माहौल बनने की तुलना करते हुए ग्रामीणों ने चिंता जताई कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो गाँव की मूल पहचान ही खत्म हो जाएगी।
खासकर वे लोग जो रोज़गार के लिए परदेस में रहते हैं, जब अपने गाँव लौटते हैं तो सुकून और अपनापन की उम्मीद लेकर आते हैं। लेकिन यहाँ भी राजनीति और तनाव का माहौल देखकर उन्हें निराशा हाथ लग रही है।
ग्रामीणों ने सभी जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे गाँव में प्रेम, भाईचारा और एकता को बढ़ावा दें, न कि राजनीति के जरिए आपसी विवाद पैदा करें। उनका कहना है कि गाँव की असली ताकत उसकी एकजुटता में है।