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कविता : सरोवर

शांत धरा की गोद में सोया,
नीले जल का दर्पण प्यारा,
सूरज जिसकी लहरों पर
रोज़ बिखेरे स्वर्ण सितारा।

वो सरोवर कितना सुंदर,
मन को देता शीतल छाया,
जिसने भी उसको निहारा,
उसने जीवन गीत सुनाया।

भोर हुई जब लाल किरण ने
जल पर अपना रूप सँवारा,
लहरों ने मुस्काकर जैसे
ओढ़ लिया हो स्वर्ण दुशाला।

कमल खिले थे जल के ऊपर,
जैसे सपनों की मुस्कानें,
भँवरे गाते मधुर तराने,
लेकर प्रेम भरी पैगामें।

धीरे-धीरे हवा चली तो
जल में कंपन होने लगा,
नीला आकाश उतरकर जैसे
उसमें अपना चेहरा देखा।

किनारे बैठे वृक्ष पुराने,
अपनी शाखाएँ फैलाए,
मानो थके हुए पथिकों को
प्रेम से अपने पास बुलाएँ।

पक्षी आकर जल पी जाते,
फिर नभ में उड़ जाते हँसकर,
कोयल मीठे गीत सुनाती,
गूँज उठे वन उसके स्वर पर।

साँझ ढले जब चंद्र निकलता,
चाँदी जैसा रूप बिखरता,
जल की हर इक छोटी लहर
तारों जैसा दीपक धरता।

रात की नीरवता में भी
सरोवर बातें करता है,
धीरे-धीरे बहती हवा से
मन का दुख भी हरता है।

कितने राज छिपे होंगे इसमें,
कितनी स्मृतियाँ बहती होंगी,
कितने सपनों की परछाईं
लहरों संग रहती होंगी।

कभी किसी ने प्रेम लिखा होगा
इसके शांत किनारों पर,
कभी किसी ने आँसू छोड़े
इसके निर्मल जलधारों पर।

गर्मी में यह राहत देता,
प्यासे जन का मित्र बनता,
सूखी धरती के होठों पर
जल बनकर जीवन धरता।

बच्चे इसके तट पर आकर
कागज़ की नावें बहाते,
छोटी-छोटी खुशियों से ही
जीवन का उत्सव मनाते।

किसान इसे देखकर खुश होते,
हरियाली मुस्काती खेतों में,
इसके जल से अन्न उपजता,
जीवन बसता रेतों में।

सरोवर केवल जल नहीं है,
धरती की यह साँस भी है,
प्रकृति का मधुर संगीत है,
जीवन का विश्वास भी है।

जब-जब मानव भूल गया है
प्रकृति का सम्मान करना,
सूख गए तब कई सरोवर,
रो पड़ी धरती का गहना।

कूड़े-कचरे और प्रदूषण ने
इनका सौंदर्य छीना है,
मानव की लापरवाही ने
इनका दर्पण तोड़ा है।

आओ मिलकर प्रण ये लें हम,
हर सरोवर स्वच्छ बनाएँ,
जल की हर बूंद को बचाकर
धरती का श्रृंगार बढ़ाएँ।

क्योंकि जल ही जीवन होता,
जल से ही संसार चलता,
सूख गए यदि ये सरोवर,
तो हर सपना भी है ढलता।

सरोवर की शीतलता से
मन में प्रेम उमड़ने दो,
इसके निर्मल शांत हृदय से
जीवन को भी जुड़ने दो।

जब भी मन में शोर मचे तो
इसके तट पर आ जाना,
शांत लहरों की भाषा में
जीवन का अर्थ समझ जाना।

सरोवर कहता धीरे-धीरे
मत अभिमान में खो जाना,
जैसे जल शांत बहता है,
वैसे ही जीवन अपनाना।

धरती की ये सुंदर आँखें,
इनको कभी न रोने देना,
हर सरोवर की रक्षा करके
प्रकृति का सम्मान करना।

नीला जल और शांत लहरियाँ,
मन को नया उजास दें,
सरोवर की मधुर कहानी
जीवन को विश्वास दें।

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