ट्रंप का चीन पहुंचना कोई साधारण घटना नहीं
मोदी जी ने ये अपील की है यह बस यूं ही नहीं कि है।
मुझे लगता है यह अपील किसी बहुत बड़े इंटेलिजेंस अलर्ट के बाद की गई है।
मेरा तो अनुमान यह है कि फिलहाल अमेरिका ने ईरान मसले को इसलिए ठंडे बस्ते में डाला है क्योंकि अमेरिका के निशाने पर अब सबसे ऊपर भारत आ चुका है।
चूंकि
"दुश्मन का दुश्मन आपका दोस्त होता है।"
इसके अनुसार भारत को घेरने के मसले पर चीन और अमेरिका दोनों मिल चुके है।
और इसीलिए ट्रंप ने चीन की यात्रा की है।
बंगाल की जीत ने अमेरिका की सारी प्लानिंग ध्वस्त कर दी है।
यदि ममता साधारण से जनमत से भी जीत जाती तो अगले कुछ वर्षों में अमेरिका ममता के साथ खड़ा होकर बंगाल को काटने का काम कर डालता।
जिससे भारत का पूर्वोत्तर भी पूरा भारत से कट जाता।
इन्हीं कुछ इनपुट के चलते शायद मोदी जी ने भविष्य की रणनीति के अंतर्गत देश की जनता से सहयोग मांगा है।
वरना यह कोई संयोग नहीं है कि पूर्वोत्तर से CIA का जासूस का पकड़े जाना, ईरान युद्ध का अचानक रुक जाना।
रूस के गैस टैंकर को वापस लौटाना, और ट्रंप की चीन यात्रा।
इन सबके पीछे एक मात्र उद्देश्य है भारत की बरबादी और यह मोदी जी होने नहीं देंगे।
निकट भविष्य में भारत की दो सीमाएं सुलग सकती है।
इसलिए
मोदी जी के हर शब्द को सुनने के साथ उसमें छुपे निहितार्थ को समझने का प्रयास करे।
और सहयोग करे।
पैदल चलने की आदत डाल लें, सोना खरीदने के बजाय आपके पास जो सोना है उसे बैंक में जमा करवाएं।
एक माचिस की तीली भी विदेशी न खरीदें।
ऊर्जा की निर्भरता अधिक से अधिक सौर ऊर्जा पर शिफ्ट करें।
खाद्यान्न और तेल का कम से कम उपयोग करें।
रसोई गैस का कम उपयोग करे।
यह समझकर कि आप भी एक सैनिक है और राष्ट्र के लिए एक युद्ध लड़ रहे हैं।