भजनलाल का ऐतिहासिक सियासी पाला-बदल: जब रातों-रात जनता पार्टी की पूरी सरकार ही बन गई कांग्रेसी
भारतीय राजनीति के इतिहास में 22 जनवरी 1980 का दिन दलबदल और सत्ता बचाने के सबसे हैरतअंगेज और अनूठे अध्याय के रूप में दर्ज है, जब हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल ने अपनी सूझबूझ और अचूक राजनीतिक बिसात से पूरी की पूरी सरकार का ही कांग्रेस में विलय कर दिया था। जब जनवरी 1980 के लोकसभा चुनाव में इन्दिरा गांधी ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में वापसी की। आपातकाल के बाद जिस तरह जनता पार्टी ने कांग्रेस शासित राज्यों की विधानसभाओं को भंग किया था, ठीक उसी तर्ज पर इन्दिरा गांधी भी गैर-कांग्रेसी राज्य सरकारों को बर्खास्त करने की तैयारी कर रही थीं और हरियाणा इस सूची में सबसे ऊपर था। अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर मंडराते खतरे को भांपते हुए राजनीतिक जोड़-तोड़ के उस्ताद माने जाने वाले भजनलाल ने बेहद गोपनीय तरीके से दिल्ली का रुख किया और इन्दिरा गांधी व संजय गांधी से मुलाकात कर अपने राजनीतिक वजूद को बचाने की रणनीति तैयार की।
इन्दिरा गांधी ने स्पष्ट तौर पर कह दिया था कि यदि वे अपनी सरकार बचाना चाहते हैं, तो उन्हें बिना विधानसभा भंग किए कांग्रेस के पक्ष में पूर्ण बहुमत साबित करना होगा। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए भजनलाल ने दिल्ली से लौटकर हरियाणा में ऐसी राजनीतिक सेंधमारी की जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी देवीलाल के कड़े पहरे और भारी सुरक्षा के बीच से विधायकों को अपनी ओर खींचा और पाला बदलने वाले विधायकों को कैबिनेट मंत्री पद, विभिन्न सरकारी निगमों व बोर्डों के अध्यक्ष पद और अन्य कई प्रलोभन देकर अपने पाले में कर लिया। इसके बाद, 22 जनवरी 1980 को इतिहास का सबसे बड़ा चमत्कार हुआ जब भजनलाल अपने साथ करीब 37 से 40 जनता पार्टी के विधायकों और पूरी कैबिनेट को एक साथ लेकर दिल्ली के 12 विलिंगडन क्रेसेंट पहुंचे और इन्दिरा गांधी के प्रति वफादारी की शपथ ले ली।
इस अभूतपूर्व घटनाक्रम के चलते हरियाणा की जो सरकार एक दिन पहले तक जनता पार्टी के बैनर तले चल रही थी, वह अगले ही दिन बिना कोई चुनाव हुए या सरकार गिरे पूरी तरह से कांग्रेसी सरकार में तब्दील हो गई और भजनलाल जनता पार्टी के मुख्यमंत्री से रातों-रात कांग्रेस के मुख्यमंत्री बन गए। इस तरह भजनलाल ने इन्दिरा गांधी के चक्रव्यूह को न सिर्फ नाकाम किया, बल्कि दलबदल की राजनीति को एक नया आयाम देते हुए 90 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस का मजबूत बहुमत स्थापित कर अपनी कुर्सी को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया।