कविता : बहादुर
जो आँधियों से टकराए,
जो तूफ़ानों से ना घबराए,
जिसके कदम कभी ना रुकें,
वही बहादुर कहलाए।
जिसके दिल में सच्चाई हो,
आँखों में उजियारा हो,
अपने से पहले जो सोच सके,
दुनिया का वह सितारा हो।
बहादुर वह नहीं केवल,
जो तलवारें चलाता है,
बहादुर तो वह भी होता,
जो दुख में मुस्कुराता है।
जिसके मन में दया बसी हो,
जिसके भीतर प्रेम जगे,
जो नफ़रत की आग बुझाकर,
इंसानियत के दीप जले।
जब अँधेरा घिर आता है,
सब रास्ते खो जाते हैं,
तब साहस के छोटे दीपक,
दुनिया को राह दिखाते हैं।
जो सच की खातिर लड़ जाए,
चाहे सारी दुनिया रूठे,
जो झूठों के आगे झुके नहीं,
चाहे कितने संकट टूटें।
सीमा पर खड़ा जवान भी,
बहादुरी की मिसाल है,
माँ की ममता में भी छिपा,
साहस का अनमोल लाल है।
एक किसान जो धूप सहकर,
धरती पर हरियाली लाए,
अपने पसीने की बूंदों से,
सपनों की फसल उगाए।
वह मजदूर भी बहादुर है,
जो पत्थर को मोती करता,
अपनी भूखी आँखों में भी,
परिवार का सपना भरता।
बहादुर वह नन्हा बच्चा,
जो गिरकर फिर उठ जाता है,
हारों के अंधियारे में भी,
उम्मीदों का गीत गाता है।
जीवन एक कठिन सफर है,
हर मोड़ यहाँ इम्तिहान,
डरकर जो पीछे हट जाए,
वह कैसे पाए सम्मान?
चलना है तो डटकर चलना,
सच के पथ पर बढ़ते जाना,
गिरना-उठना, हँसना-रोना,
फिर भी मंज़िल को अपनाना।
याद रखो इस दुनिया में,
सबसे बड़ा वही इंसान,
जो अपने साहस और कर्मों से,
बढ़ा दे मानव का मान।
इसलिए तुम कभी ना डरना,
मुश्किल से मत घबराना,
अपने हौसले की ताकत से,
नया इतिहास बनाना।
जब तक दिल में आग रहेगी,
जब तक सपनों की उड़ान,
तब तक दुनिया गाती होगी
देखो, आया एक बहादुर इंसान!