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भ्रष्टाचार का 'इंजीनियर' रंगे हाथ गिरफ्तार!

भ्रष्टाचार का 'इंजीनियर' रंगे हाथ गिरफ्तार!

सीतामढ़ी: नगर परिषद के जेई ने 1.69 करोड़ के काम के बाद भी 1.45 लाख की रिश्वत माँगी निगरानी ने बिछाया जाल, दबोचा गया!

विजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार

पटना: बिहार के सीतामढ़ी जिले की पुपरी नगर परिषद में एक और भ्रष्टाचार का घृणित अध्याय सामने आया है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (NIB), बिहार, पटना की मुख्यालय टीम ने 15 मई 2026 को जनकपुर रोड स्थित नगर परिषद कार्यालय के परिसर से कनीय अभियंता (जेई) श्री विजय कुमार शर्मा को 1,45,000/- (एक लाख पैंतालीस हजार) रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

यह कार्रवाई निगरानी थाना कांड सं0-057/26 के अंतर्गत की गई है। मामले की जाँच डीएसपी श्री पवन कुमार-I, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के नेतृत्व में की जा रही है।
अभियुक्त को पूछताछ के उपरांत माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी, मुजफ्फरपुर में उपस्थापित किया जाएगा।

1.69 करोड़ का काम और फिर भी रिश्वत की माँग?
इस मामले की जड़ें तब से जुड़ी हैं जब परिवादी श्री मुरली मनोहर, निवासी: पुपरी, जनकपुर रोड, थाना-पुपरी, जिला-सीतामढ़ी) ने नगर परिषद पुपरी में दो महत्वपूर्ण विकास कार्य पूरे किए थे। इन दोनों कार्यों के बिल का भुगतान भी हो चुका था

इसके बावजूद जब श्री मुरली मनोहर ने आगे का कार्य आवंटित कराने के लिए कनीय अभियंता विजय कुमार शर्मा से सम्पर्क किया, तो आरोपी ने बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए 1,45,000/- (एक लाख पैंतालीस हजार) रुपये की रिश्वत की माँग कर दी।

" जिस नगर परिषद ने 1.69 करोड़ रुपये का काम दिया, उसी के इंजीनियर ने 'अगला काम' देने के लिए 1.45 लाख की घूस माँगी यही है बिहार के नगर निकायों में व्याप्त भ्रष्टाचार का असली चेहरा! "

निगरानी की कार्रवाई कैसे बिछाया गया जाल?
परिवादी ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।
ब्यूरो ने शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पहले उसका सत्यापन कराया।
सत्यापन के दौरान आरोपी द्वारा रिश्वत माँगे जाने का प्रत्यक्ष प्रमाण मिला।
प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के पश्चात, निगरानी थाना कांड संख्या 0-057/26 (दिनांक 14.05.2026) अंकित किया गया।

डीएसपी श्री पवन कुमार-I के नेतृत्व में एक विशेष धावादल गठित किया गया। 15 मई 2026 को जैसे ही परिवादी ने नगर परिषद कार्यालय परिसर, पुपरी में रिश्वत की रकम दी, धावादल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अभियुक्त विजय कुमार शर्मा को रंगे हाथ दबोच लिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरे नगर परिषद कार्यालय और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।

सिस्टम से सवाल,
सवाल सिर्फ एक इंजीनियर की गिरफ्तारी का नहीं है।
सवाल यह है कि एक कनीय अभियंता इतना निर्भीक कैसे हो गया कि एक लाख पैंतालीस हजार रुपये की खुलेआम माँग कर बैठा?
क्या वह इकलौता भ्रष्ट था, या पूरी श्रृंखला में यही संस्कृति पैठ बना चुकी है?
यह घटना बिहार के नगर निकायों में ठेकेदारों और अभियंताओं के बीच चलने वाली उस अघोषित 'कमीशन प्रणाली' को उजागर करती है जहाँ हर काम के बाद 'अगले काम' के लिए ऊपरी कमाई को अनिवार्य समझा जाता है।
1.69 करोड़ की परियोजना में पहले ही भुगतान हो जाने के बाद भी 'आगे का काम देने' के लिए रिश्वत की माँग यह बताती है कि यह अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि एक व्यापक सड़ांध का हिस्सा है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की इस कार्रवाई को जितनी सराहना मिलनी चाहिए, उतनी ही तत्परता से यह भी पूछा जाना चाहिए क्या केवल ट्रैप करके गिरफ्तार करना पर्याप्त है?
गिरफ्तार अभियुक्त के विभागीय वरिष्ठों की भूमिका की जाँच कब होगी?
क्या इस जेई के कार्यकाल में हुए अन्य ठेकों की भी समीक्षा की जाएगी?

'भ्रष्टाचार मुक्त बिहार' के नारे के साथ नगर निकाय प्रशासन का आधुनिकीकरण हो रहा है।
पुपरी नगर परिषद का जेई 1.45 लाख की रिश्वत लेते पकड़ा गया यही 'आधुनिकीकरण' की असलियत है।
सरकारी ठेकों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।
1.69 करोड़ के पूर्ण भुगतान वाले ठेके के बाद भी 'आगे काम' के लिए रिश्वत पारदर्शिता का यह नमूना है।
निगरानी विभाग सक्रिय है और भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
गिरफ्तारी स्वागत योग्य है, परन्तु विभागीय उच्चाधिकारियों की जाँच और सुनिश्चित दोषसिद्धि ही असली कसौटी होगी।

निष्कर्ष सिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की इस त्वरित कार्रवाई से पुपरी की जनता को न्याय की उम्मीद जरूर जागी है।
परन्तु यह उम्मीद तभी पूरी होगी जब आरोपी विजय कुमार शर्मा को केवल गिरफ्तार करके छोड़ा न जाए, बल्कि विशेष निगरानी न्यायालय, मुजफ्फरपुर में मुकदमा त्वरित गति से चलाया जाए, दोषसिद्धि सुनिश्चित हो और संपत्ति का ब्यौरा भी खंगाला जाए।
बिहार में नगर निकायों की बदहाली केवल बजट की कमी नहीं, बल्कि इस तरह के भ्रष्ट तंत्र का परिणाम है जहाँ जन-धन ठेकेदारों और इंजीनियरों के बीच बाँटा जाता है। जब तक ऐसे मामलों में विभागीय जाँच, संपत्ति जब्ती और त्वरित सजा नहीं होगी तब तक हर गिरफ्तारी महज एक चेतावनी बनकर रह जाएगी, जो अगले दिन दूसरा भ्रष्ट अफसर भूल जाएगा।
" क्या पुपरी का यह जेई इकलौता था या यह तो बस एक धागा है जिसे खींचने पर पूरा जाल बाहर आ सकता है? "

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