*भोजशाला फैसले पर क्षेत्र में खुशी की लहर, 2003 के आंदोलन की यादें हुईं ताजा*,
*भोजशाला फैसले पर क्षेत्र में खुशी की लहर, 2003 के आंदोलन की यादें हुईं ताजा*,
*ढोल ढमाके के साथ कि आतिशबाजी, गुलाल उड़ाकर होली भी खेली,*
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धार स्थित भोजशाला को लेकर आए न्यायालयीन फैसले के बाद क्षेत्रभर में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। हिंदू समाज व संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे वर्षों के संघर्ष और आस्था की जीत बताया। न्यायालय ने भोजशाला को मंदिर माना है।
यहां पीपलेश्वर चौराहे पर आज शाम ढोल ढमाक के साथ आतिशबाजी कर मिठाई बांटकर एक दूसरे को बधाई दी व जमकर होली खेली। बस स्टैंड, बड़ी चौपाटी समेत नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने आतिशबाजी कर प्रसन्नता व्यक्त की।
*कई लोग गए थे जेल*
कोर्ट के फैसले के बाद वर्ष 2003 में चले भोजशाला मुक्ति आंदोलन की यादें भी लोगों के बीच ताजा हो गईं। उस समय भोजशाला मुक्ति अभियान को लेकर पूरे क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन हुआ था। आंदोलन में बदनावर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किए और कई लोग कई दिनों तक जेल भी गए थे। वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने बताया कि उस दौर में भोजशाला को लेकर क्षेत्र में अभूतपूर्व जनसमर्थन देखने को मिला था। युवाओं, सामाजिक संगठनों एवं धार्मिक संस्थाओं ने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई थी। आंदोलन के दौरान अनेक कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी देकर अपने संघर्ष और आस्था का परिचय दिया था।
फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा कि वर्षों पहले जिस उद्देश्य को लेकर संघर्ष किया गया था, आज वह सफल होता दिखाई दे रहा है। लोगों ने इसे सनातन आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।नगर में दिनभर इस फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा तथा लोगों ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए प्रसन्नता जाहिर की।