"कोलकाता के राम मोहन कॉलेज से राम शब्द हटाने का दावा: सोशल मीडिया पोस्ट में ममता-अखिलेश पर तुष्टिकरण के आरोप"
"कोलकाता के राम मोहन कॉलेज से राम शब्द हटाने का दावा: सोशल मीडिया पोस्ट में ममता-अखिलेश पर तुष्टिकरण के आरोप"
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव पर मुस्लिम तुष्टिकरण के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पोस्ट में क्या दावा किया गया?
वायरल पोस्ट के अनुसार, कोलकाता के मुस्लिम बहुल इलाके में स्थित राम मोहन कॉलेज के नाम से राम शब्द हटवा दिया गया। दावा है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ममता बनर्जी से शिकायत की थी कि कॉलेज के बोर्ड पर राम शब्द देखने से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। इसके बाद ममता बनर्जी ने राम शब्द मिटवा दिया।
अखिलेश यादव पर भी आरोप
पोस्ट में आगे दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान भी ऐसी ही घटना हुई थी। आरोप है कि मुस्लिम समुदाय ने शिकायत की थी कि शुक्रवार को मंदिर की घंटियों की आवाज से उन्हें परेशानी होती है। इसके बाद कई मंदिरों में शुक्रवार के दिन पुलिस की ड्यूटी लगा दी गई थी ताकि कोई हिंदू घंटी न बजा सके।
तुष्टिकरण की हद पार की
पोस्ट लिखने वाले ने दोनों नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा है कि ममता बनर्जी और अखिलेश यादव मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए नीचता की सारी हदें पार कर चुके हैं। पोस्ट में यह भी लिखा गया है कि ऐसे नेताओं को सिर्फ स्वार्थी हिंदू ही वोट दे सकता है, कोई स्वाभिमानी हिंदू इन्हें वोट नहीं देगा।
सच्चाई क्या है?
फिलहाल इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राम मोहन कॉलेज कोलकाता का नाम राजा राम मोहन राय के नाम पर है और अभी भी कॉलेज की वेबसाइट पर यही नाम दर्ज है। वहीं, यूपी में मंदिरों में घंटी बजाने पर रोक के किसी सरकारी आदेश की पुष्टि भी नहीं हुई है।
यह पोस्ट #explorepage #viralpost जैसे हैशटैग के साथ शेयर की जा रही है। राजनीतिक दलों की ओर से अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
नोट: यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों पर आधारित है। इन दावों की सत्यता की पुष्टि नहीं करता।
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