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होर्मुज संकट पर सिंगापुर PM की चेतावनी: दुनिया पर मंडरा रहा महंगाई और मंदी का खतरा, भारत से ऊर्जा बचत की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने, हम भारतीयों को क्यूं कहा, रोजमर्रा ऊर्जा खपतों को कम करने के लिए.!? इसका पूरा विवरण दुनिया को बताते हुए सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने चेतावनी देते हुए कहा कि, दुनिया एक बार फिर से, स्टैगफ्लेशन की चपेट में आ सकती है.

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्थित जलडमरूमध्य पर जारी संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें बढ़ा दी हैं. सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि यह नाकेबंदी लंबे समय तक जारी रही, तो दुनिया 1970 के दशक जैसे तेल संकट के मुहाने पर खड़ी होगी. उन्होंने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में ईंधन की भारी किल्लत, आसमान छूती महंगाई और भीषण आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है.

वोंग ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पिछले दो महीने से अधिक समय से बंद है. इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि खाड़ी देशों से होने वाले आयात पर निर्भर एशियाई अर्थव्यवस्थाएं इस संकट से सबसे ज्यादा और बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. पिछले दो महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% का जबरदस्त उछाल आया है, जिससे तेल आयातक देशों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया है.

इससे सिर्फ तेल ही नहीं, थाली और तरक्की पर भी होगा हमला. प्रधानमंत्री वोंग ने आगाह किया कि यह रुकावट केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी. ओर इसके घातक परिणाम अन्य क्षेत्रों में भी दिखने लगे हैं. जैसे कि हवाई सफर और उद्योग: एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें कम कर दी हैं और फैक्ट्रियों में उत्पादन में देरी की खबरें आ रही हैं. जरूरी सामान: उर्वरक खाद्य पदार्थ और अन्य आवश्यक वस्तुओं की भी भारी कमी होने की आशंका है. स्टैगफ्लेशन का खतरा: वोंग ने पुराने दिनों की याद दिलाते हुए कहा कि दुनिया एक बार फिर 'स्टैगफ्लेशन' यानी कि महंगाई और मंदी का एक साथ होना की चपेट में आ सकती है, जो व्यवसायों और श्रमिकों के लिए बेहद कष्टदायक होगा.

सबसे चिंताजनक विषय यह है कि, यदि आज यह समुद्री मार्ग खुल भी जाए, तो भी स्थिति सामान्य होने में कई महीने लग जाएंगे. वोंग के अनुसार, बंदरगाहों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और समुद्री रास्तों से मलबे को साफ करना होगा. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए दोबारा बीमा उपलब्ध कराना और विश्वास बहाल करना एक लंबी प्रक्रिया होगी, जो रातों-रात संभव नहीं है.

वैसे भारत, इन सभी खतरों से निपटने के लिए, पहले से ही तैयारी कर रखी है. लेकिन सबसे चिंता बढ़ाने वाली बात यह है कि, बोकाचोदा डोनाल्ड ट्रंप की दुनिया को 16 मई तक रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दिए गए अल्टीमेटम है. इससे भारत जैसे देश ज्यादा प्रभावित होंगे. फिर भी भारतीय सरकार इस संकट को टालने में लगी है. इसको लेकर पप्पू और उसके चमचे पूरे देशभर में जो Panic फैला रहे हैं, न तो वह इस देश को समझते हैं, न ही देश की भला सोच रहे हैं. इसलिए किसी भी प्रकार के भ्रमात्मक खबरों से दूर रहे और अपने रोजमर्रा की काम वैसे ही करते रहिए, जैसे पहले करते आ रहे हैं. वस अपनी रोजमर्रा के ऊर्जा खपतों को थोड़ा सा कम कर दीजिए, ताकि हमारे विदेशी मुद्रा भंडार पर ज्यादा प्रेशर न पड़े. भगवान उन बुद्धिहीन परजीवी पप्पू के गुलामों को सद्बुद्धि दें.

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