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नवजातों के लिए वरदान बना सी-पैप, एसएन मेडिकल कॉलेज में हर साल बच रही 1650 की जान

आगरा, । उत्तर प्रदेश में नवजात मृत्यु दर को कम करने में 'सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट' (एसएनसीयू) में स्थापित सी-पैप (CPAP) मशीनें मील का पत्थर साबित हो रही हैं। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में इस आधुनिक तकनीक की मदद से हर साल करीब 1650 नवजात शिशुओं को नया जीवन मिल रहा है। यहाँ उत्तर प्रदेश के 10 जिलों के अलावा राजस्थान (भरतपुर, धौलपुर) और मध्य प्रदेश (भिंड, मुरैना) से भी गंभीर शिशु इलाज के लिए आ रहे हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पंकज कुमार और बाल रोग विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) नीरज यादव ने बताया कि समय से पहले जन्मे (प्री-मैच्योर) बच्चों के फेफड़ों में कमजोरी के कारण सांस लेने में दिक्कत होती है। सी-पैप एक 'नॉन-इन्वेसिव' तकनीक है, जिसमें पारंपरिक वेंटिलेटर की तरह गले में नली डालने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके जरिए नाक के रास्ते निश्चित मात्रा में ऑक्सीजन फेफड़ों तक पहुंचाई जाती है, जिससे फेफड़े फूलने लगते हैं। इसके साइड इफेक्ट्स बहुत कम हैं और बच्चे की सेहत में तेजी से सुधार होता है। डॉ. नीरज यादव ने बताया कि विभाग की 24 बेड की नर्सरी में हर साल करीब 1800 बच्चे भर्ती होते हैं, जिनमें 25% प्री-मैच्योर होते हैं। यहाँ डॉक्टरों की टीम ने 800 से 1000 ग्राम तक के बेहद कमजोर बच्चों को भी पूरी तरह स्वस्थ कर घर भेजा है। हाथरस की पूनम और धौलपुर की सुमन जैसी कई माताओं के गंभीर बच्चों को इस तकनीक और डॉक्टरों के प्रयास से नया जीवन मिला है। एसएनसीयू में आगरा के अलावा आसपास के राज्यों के करीब एक दर्जन जिलों से मरीज आते हैं। हमारी टीम पूरी निष्ठा से इन नवजातों का उपचार करके उनकी जान बचा रही है। डॉ. प्रशांत गुप्ता, प्रधानाचार्य, एसएन मेडिकल कॉलेज

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